Wednesday , September 20 2017
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रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में उतरे म्यांमार के कैथोलिक नेता, कहा- अब तो चुप्पी तोड़ें आंग सान 

म्यांमार के शीर्ष कैथोलिक नेता कार्डिनल चार्ल्स माउंग बो ने रोहिंग्या मुसलमनों के उत्पीड़न पर नोबेल पुरस्कार विजेता एवं स्टेट काउंसलर आंग सान सू की  की चुप्पी को ग़लत बताया है। उन्होंने कहा कि आंग सान सू  को इस मुद्दे पर बोलना चाहिए, पूरी दुनिया में रोहिंग्या संकट पर म्यांमार सरकार की खामोशी की आलोचना हो रही है।

यांगोन के मुख्य पादरी कार्डिनल चार्ल्स माउंग बो ने कहा कि दुनिया आंग सान सू को संघर्षवादी महिला के रूप में देखती है, जिसने लोकतंत्र के लिए कड़ा संघर्ष किया था। अब वह सरकार का हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें रोहिंग्या संकट पर ज़रूर बोलना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक, 3 लाख 70 हज़ार से ज़्यादा लोग म्यांमार के राखीन राज्य से बांग्लादेश पलायन कर चुके हैं। यूएन मानव उच्चायुक्त को मिली रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा बलों और मिलिशिया रोहिंग्या कस्बों को जला रहे हैं और नागरिकों को भागने के लिए गोलीबारी कर रहे हैं।

आंग सान सू की ने अभी तक बहुसंख्यक बौद्ध देश में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा की निंदा नहीं की है। बुधवार को, सू क़ी ने न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरे को रद्द कर दिया। इसके साथ ही सू की ने बिगड़ते हालात के लिए ग़लत सूचना अभियान और “फ़ेक न्यूज़” को ज़िम्मेदार ठहराया था।

कैथिक नेता ने कहा कि मीडिया के ज़रिए सू की पर हमला करना समस्या का समाधान नहीं है। उनका एक ग़लत कदम उन्हें सरकार से बाहर कर देगा और ये लोकतंत्र के सुनहरे सपने का ख़ात्मा होगा।

बो कहते हैं, “इस संदर्भ में, मेरी सलाह यह है कि इस वक्त स्थिति को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नरसंहार या जातीय सफाई के रूप में पेश न करें, जिसे सरकार एक जातीय राष्ट्रीयता के रूप में नहीं पहचानती है बल्कि बांग्लादेश से इंटरलॉपरों के समूह के रूप में पहचान करती है”। उन्होंने हिंसा को नरसंहार के रूप में पेश करने के खिलाफ चेतावनी दी।

बो ने कहा कि म्यांमार की समस्या न सिर्फ राखीन प्रांत में है, बल्कि करेन, काचिन, और शान में भी हालात खराब हैं।

कार्डिनल बो यह भी मानते हैं कि समस्या म्यांमार से बड़ी है “वैश्विक इस्लामोफोबिया और ताकतवर देशों द्वारा हालिया मुसलमानों के साथ भेदभाव ने इस्लाम के खिलाफ कई देशों में नफरत की आग पैदा कर दी है,।”

बो ने बताया कि म्यांमार में शांति बहाल करने के लिए स्थानीय पादरी पूरी तरह से जुटे हुए हैं। बो खुद भी इस दौरान कई बार सू की से मिल चुके हैं और हाल ही में उन्होंने पहली बार सेना के जनरल्स से मुलाकात की है।

पोप फ्रांसिस के आगामी म्यांमार दौरे का ज़िक्र करते हुए बो ने कहा, “मैं उम्मीद करता हूं कि पोप म्यांमार के लोगों के कई मुद्दों को इस तरह संबोधित करेंगे जिससे यहां के हालात ठीक हो जाएं”।

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