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मुबारकबाद! ऑटो रिक्शा चालक की बेटी फरहाना बनीं गुजरात बोर्ड एग्ज़ाम में साइंस टॉपर

अहमदाबाद: गुजरात बोर्ड परीक्षा की 12वीं का परिणाम गुरुवार को घोषित कर दिया गया। इस परीक्षा में जमालपुर एफडी की छात्रा फरहाना बवानी ने 99.71 फीसद अंक प्राप्त कर के साइंस विषय में टॉप किया है। बता दें कि फरहाना एक रिक्शा चालक की बेटी है।

हालांकि फरहाना की मां शमीम बवानी कहती हैं कि उन्हें इस बात की खुशी नहीं है क्योंकि उनका परिवार गुजराती है और नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) की अंग्रेजी की परीक्षा गुजराती भाषा की परीक्षा से अलग और अधिक कठिन थी।

उन्होंने कहा कि ये संयुक्त परीक्षा परिणाम फरहाना और उसके जैसे हजारों छात्रों के लिए न्याय संगत नहीं है।

उन्होंने कहा,  “मेरी बेटी ने इस परीक्षा के इतर भविष्य में दूसरे किसी भी विकल्प पर विचार नहीं किया था। हमारी अब सिर्फ एक ही प्रार्थना है कि राज्य सरकार गुजराती और अंग्रेजी माध्यम के परीक्षा परिणाम अलग-अलग घोषित करे ताकि मेरी बेटी को कोई और विकल्प मिल जाए।”

उन्होंने बताया कि फरहाना ने चारों सेमेस्टर में अच्छे अंक प्राप्त किए। उसने बहुत मेहनत की। फरहाना दो महीनों तक सोना-खाना भूल गई थी। उसने अपना सारा वक्त पढ़ाई में करने में बिताया। वो बताती हैं कि उनकी बेटी का बचपन से ही सपना है कि वो बड़ी होकर एक डॉक्टर बने। इसी लिए उसने साइंस विषय चुना।

वहीं, दूसरी तरफ फरहाना कहती हैं कि नीट का गुजराती भाषा का पेपर बेहद कठिन था जबकि अंग्रेजी भाषा का काफी आसान। फरहाना कहती हैं कि परीक्षा में नियम काफी कठिन थे। परीक्षा से पहले मुझे पूरा भरोसा था कि उनका परीक्षा परिणाम अच्छा आएगा और आसानी से एमबीबीएस की सीट मिल जाएगी। लेकिन मेरी परीक्षा अच्छी नहीं गई।

फरहाना बताती हैं कि उनके पिता ऑटोरिक्शा चलाते है और उनके परिवार को आर्थिक समस्या का सामना रहता है। लेकिन इसके बावजूद उनके परिवार वालों ने पढ़ाई को लेकर उनका समर्थन किया।

उन्होंने पढ़ाई से जुड़ी हर चीज मुहैया कराया। वो यह भी कहती हैं ये कभी नहीं सोचना चाहिए कि आर्थिक हालत सही नहीं होने की वजह से हम अच्छा नहीं कर सकते बल्कि हम मेहनत के बल पर कुछ भी कर सकते हैं।

फरहाना के पिता महीने में बमुश्किल से 8 से 10 हजार ही कमा पाते है और उतने में ही पूरे परिवार पालन-पोषण होता। फरहाना के पिता बताते हैं कि उन्होंने अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए बहुत मेहनत की, क्योंकि उनके परिवार का मानना था उनके परिवार में बेटी पहली सदस्य होगी जो उनका सपना पूरा करेगी।

फारुखभाई ने कहा, “मैंने 12वीं तक पढ़ाई की है जबकि मेरी पत्नी 10वीं तक पढ़ी है। हमारे परिवार के किसी सदस्य ने 12वीं से आगे की पढ़ाई नहीं की। लेकिन मेरी बेटी परिवार पहली सदस्य होगी जो 12वीं से आगे की पढ़ाई करेगी और हमारे सपनों को पूरा करेगी।

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