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योगी राज में जमकर हो रहा है अवैध खनन, ख़ुद भाजपा विधायक ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

सत्ता में आते ही उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में अवैध उत्खनन पर रोक लगाने का दावा किया था । लेकिन हक़ीकत ये है कि प्रदेश में धड़ल्ले से अवैध खनन का कारोबार चल रहा है ।

ओबरा से बीजेपी विधायक संजीव कुमार गोंड ने प्रदेश में चल रहे अवैध खनन को लेकर सीएम आदित्यनाथ से शिकायत की है । मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में संजीव कुमार कहा है कि सरकार के कड़े आदेश के बावजूद खनन विभाग में भ्रष्टाचार कम होने का नाम नहीं ले रहा है ।

उन्होंने कहा कि खनिज और परिवहन विभाग के अधिकारी मिलकर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के परमिट पर बालू गिट्टी लदी ट्रकों का बेरोक टोक परिवहन करा रहे हैं और इसके एवज में भारी वसूली की जाती है ।

बताया जाता है कि खनन विभाग में पिछले दो माह से चोरी छिपे पहले ही की तरह सिंडिकेट चल रहा है जिसकी भनक जिले के आला अधिकारियों तक को नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विधायक की शिकायत के बाद सोनभद्र में खनन वैरियर प्रभारी गौरीशंकर तिवारी के ऊपर गाज गिर गयी और उनका जिले से बाहर ट्रांसफर कर दिया गया।

विधायक संजीव कुमार गोंड ने खनन विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायत योगी आदित्यनाथ के मिर्जापुर दौरे के वक्त हुई समीक्षा बैठक में की थी । विधायक का दावा है कि रोज तक़रीबन 60 से 80 ट्रक बिना वैध कागजातों के खनन क्षेत्र से पार कराये जा रहे हैं।

सत्ता परिवर्तन होते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने का दावा किया था। इसके बाद बालू की निकासी न होने से जहां बड़ी- बड़ी परियोजनाएं ठप हो गई थीं तो वहीं शासन की शीर्ष प्राथमिकता में शामिल इंदिरा आवास, प्रधानमंत्री आवास के साथ ही साथ शौचालय निर्माण नहीं हो पा रहे थे।

बालू को लेकर हर ओर हाहाकार मचा हुआ है। दुकानों पर जहां बालू मिल भी रही थी तो उनके दाम आसमान पर थे विधायक का कहना है कि इस स्थिति का फायदा उठाकर खनन माफिया भारी फायदा कमा रहे हैं।

खनन विभाग के ऊपर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि अधिकारियों द्वारा परमिट उर्द एम एम 11 की कालाबाजारी में बड़ा खेल खेला जा रहा है। बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में आज तक के इतिहास में सबसे ऊंचे दामों में परमिट बेचा जा रहा है।

विभाग के मिलीभगत से एम एम 11 चंद लोगो को ही मिल पा रहा है बाकी सैकडो़ क्रशर व्यवसाय पूरी तरह ठप पड़ा है।गौरतलब है कि अब तक खनिज विभाग द्वारा भ्रष्टाचार का सारा खेल परमिट के माध्यम से ही खेला जा रहा था ।

पिछले 16 वर्षों से खनिज विभाग उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बना हुआ था। यह खनिज विभाग का भ्रष्टाचार ही था कि पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति सीबीआई के शिकंजे में फंस गए। महत्वपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, बांदा ,महोबा इत्यादि जिलों में प्रतिमाह गिट्टी बालू के अवैध खनन को प्रश्रय देते हुए उद्यमियों से तक़रीबन 20 करोड़ रूपए की वीवीआइपी वसूली कराई जाती थी ।

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