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बाबरी विध्वंस: आडवाणी पर मुकदमा चलेगा या नहीं, इसका फ़ैसला बुधवार को होगा

वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाने के आरोप में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं समेत 19 नेताओं पर साजिश का मुकदमा चलना चाहिए या नहीं, इसका फैसला बुधवार को सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा। शीर्ष कोर्ट ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। न्यायमूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन निर्णय सुनाएँगे। 25 साल पुराने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 7 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था।

 

1992 में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद सीबीआई ने कोर्ट में कहा था कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 14 नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश का ट्रायल चलना चाहिए।

 

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के साजिश की धारा को हटाने के फैसले को रद्द किया जाए। इन नेताओं पर मुकदमें पर सुप्रीम कोर्ट फैसला करेगा। सुप्रीम कोर्ट लालकृष्ण आडवाणी, कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी, और भाजपा, विहिप के अन्य नेताओं पर से आपराधिक साजिश रचने के आरोप हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है।

 

सीबीआई के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि इस मामले में सभी अभियुक्तों के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच एजेंसी ने शीर्ष अदालत को यह भी बताया कि 21 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश का आरोप हटाया गया है, जिसमें तकनीकी आधार पर भाजपा नेताओं सहित कई लोग शामिल हैं और इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा था।

 

दूसरा मामला लाखों कारसेवकों (स्वयंसेवकों) के खिलाफ था जो बाबरी मस्जिद के अंदर और आसपास थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी और अन्य के खिलाफ जो 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में रामकथा कुंज में मंच पर थे, जब बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था।

 

 

 

इन अपीलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 20 मई 2010 के आदेश को खारिज करने का आग्रह किया गया है। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले की पुष्टि करते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) हटा दिया था।

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