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वासुदेव कुटुम्बकम के उलट भारत से निकाले जा रहे हैं रोहिंग्या मुसलमान, बांग्लादेश ने बेसहारों के लिए खोले दरवाज़े

म्यांमार से हज़ारों की संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश का रुख कर रहे हैं । जहां भारत रोहिंग्या शरणार्थियों को उनके देश वापस भेज रहा है वहीं बांग्लादेशी अधिकारी कॉक्स बाजार जिले में और शिविर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। कॉक्स बाजार जिला प्रवक्ता ने एफे न्यूज से गुरुवार को कहा, “इस समय वे जहां भी हैं, वहां रह सकते हैं।

प्रवक्ता ने कहाकि हम जल्द ही पासपोर्ट विभाग की मदद से उनकी कानूनी दस्तावेज संबंधी प्रक्रिया शुरू करेंगे,उसके बाद हम इन्हें बालुखली शिविर तैयार हो जाने के बाद वहां ले जाएंगे।” बालुखली स्थित नए शिविर के सीमांकन का कार्य बुधवार से शुरू किया गया और इसका निर्माण गुरुवार को अंतिम चरण में है।

उन्होंने कहा कि एक बार जैसे ही सीमांकन प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, बांग्लादेशी पासपोर्ट विभाग और स्थानीय अधिकारी हाल ही में यहां आए 1,50,000 रोहिंग्या शरणार्थियों के फोटो और फिंगर प्रिंट रजिस्टर करने की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। बांग्लादेश में 300,000 से 500,000 के बीच रोहिंग्या समुदाय के लोग रहते हैं जिनमें से केवल 32,000 को शरणार्थी का दर्जा मिला हुआ है।

वहीं तुर्की की प्रथम महिला एमिन एर्दोगान व विदेश मंत्री मेलवुत कावुसोग्लु गुरुवार को रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय से मिलने के लिए बांग्लादेश पहुंचीं । रोहिग्या म्यांमार के रखाइन राज्य में जारी हिंसा के कारण वहां से पलायन कर बांग्लादेश पहुंचे हैं।

समाचार एजेंसी एफे न्यूज के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने कहा कि एमिन व कावुसोग्लु अलग-अलग पहुंचे। उनके म्यांमार सीमा के करीब कॉक्स बाजार जिले में शरणार्थी शिविरों का दौरा करने का कार्यक्रम है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए.एच. महमूद अली व विदेश राज्य मंत्री शहरीर आलम भी तुर्की के प्रतिनिधिमंडल के साथ होंगे ।

तुर्की ने रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं । उसने म्यांमार से पलायन कर रहे रोहिंग्या मुस्लिमों के रहन में होने वाले खर्चे को खुद उठाने का एलान करते हुए बांग्लादेश से कहां है कि वो रोहिंग्या मुस्लिमों को अपने यहाँ आने दे । तुर्की की इस पहल के बाद कुछ और देशो ने भी बांग्लादेश को मदद करने का एलान किया है ।

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