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कामाख्या मंदिर में नागा साधुओं के प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध

गुवाहाटी के मशहूर कामख्या मंदिर में 22 जून से शुरू होने वाले अंबुवासी मेले में नागाओं के प्रवेश पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। मंदिर अथॉरिटी का कहना है कि नागा साधु नंगे घूमते हैं और गांजा पीते हैं, अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं जिससे दर्शन के लिए आने वाले लोगों को शर्मिंदगी महसूस होती है।

इस फैसले से नागा साधू नाराज हो, हैं क्योंकि वे सदियों से इस मेले में भाग लेते आए हैं। दरअसल मंदिर प्रशासन ने नागा साधुओं के लिए अलग जोन की व्यवस्था का फैसला लिया है। यह जोन मुख्य मंदिर से काफी दूर होगा। नागा साधू शिव के अनुयायी हैं।

कामाख्या मंदिर के मुख्य पुजारी पबिन्द्र प्रसाद शर्मा डोलोई ने कहा कि इस साल से इस तरह की आध्यात्मिकता को मेले के मुख्य स्थल में अनुमति नहीं दी जाएगी। मेले के दौरान कई लोग मंदिर परिसर में अपने परिवारों के साथ आते हैं। मुख्य स्थल में नागा साधुओं को देखकर उन्हें असुविधा होती है, इसलिए इस साल से हमने नागा साधुओं को यहां घूमने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है। इसकी बजाय हम उनके लिए दूसरी व्यवस्था करेंगे।

इस बार मंदिर परिसर में नागा साधुओं को जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि मंदिर परिसर में नागा साधुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की एक और वजह बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि नागा साधू ड्रग्स लेते हैं इसलिए उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में हुए मेलों में नागा साधुओं को ड्रग्स पीते हुए पाया गया। पिछले साल कामाख्या मंदिर के पूरे इलाके को नो-निकोटीन जोन घोषित किया गया था।

यह पहला मौका है जब नंगे रहने और गांजा पीने पर नागाओं के किसी मंदिर या मेले में प्रवेश पाबंदी लगाई गई है। कामाख्या मंदिर के अंबुवासी मेले में नागाओं के आने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। जब एंट्री बैन करने पर हल्ला मचा तो मंदिर अथॉरिटी ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की है। कहा गया है कि नागा साधुओं के लिए मंदिर परिसर से दूर अलग जोन बनाया जा रहा है। वे सिर्फ वहीं प्रवेश कर सकेंगे। यानि मुख्य मंदिर में नागा दर्शन के लिए नहीं जा सकेंगे।

नागाओं के कामाख्या मंदिर में जुलूस की शक्ल में गाजे बाजे के साथ प्रवेश की परंपरा रही है। इस बार उनके जुलूस निकालने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। यानि नागा चुपके से आएं, अपने जोन में रहें और बिना किसी शोरशराबे के वहां से निकल जाएं। कुंभ मेले में भी 13 अखाड़ों के नागाओं के स्नान की परंपरा है।

जब नागा साधु स्नान के लिए आते हैं तो कुंभ मेले के सभी मुख्य घाट आम लोगों के लिए बंद कर दिए जाते हैं लेकिन कामाख्या मंदिर में तो उल्टा ही हो रहा है। साधुओं ने इसका विरोध भी किया है। कहा है कि आम लोगों को अगर नागाओं से दिक्कत है तो उनके लिए समय सीमा ही निर्धारित कर दी जाए। वह तय समय पर मंदिर में आएंगे और चले जाएंगे। इस विकल्प पर भी मंदिर अथॉरिटी ने ना कर दी है।

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