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BJP के शासन वाले महाराष्ट्र और पंजाब में किसानों की सबसे बुरी हालत- रिपोर्ट

पूरे देश में एक साल के भीतर 2990 किसानों की खुदकुशी, सर्वाधिक संख्या 1898 महाराष्ट के फड़नवीश सरकार में, पंजाब बद से बदतर

किसानों की खुदकुशी एक मसला है जिसपर विकास कम राजनीति ज्यादा होती है। सभी राज्य सरकारे दावा करती हैं सबसे ज्यादा किसान उनके राज्य में सुखी है। कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी और गुजरात से लेकर असाम तक सभी राज्य सरकारे अपने-अपने राज्य में किसानों हालत दूसरे राज्यों की अपेक्षा बेहतर दिखाने का हर सम्भव प्रयास करती है लेकिन जब आंकड़े पटल पर रखे जाते है विकास के दावे खुदकुशी के आकड़ों के आगे मुंह चिढ़ाते नज़र आते हैं। साल 2014 में जब देश का सत्ता परिवर्तन हुआ और केन्द्र में एनडीए की सरकार बनी तब बीजेपी शासित राज्यों में किसानों ने काफी उम्मेंदे लगा रखी थी

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लेकिन जब किसानों की खुदकुशी के आकड़ों का खुलासा सूचना के अधिकार से प्राप्त हुआ तब चौकाने वाले आंकड़े सामने आए। ग़ाज़ीपुर जिले के दिलदार नगर थानाक्षेत्र के उसियाँ गांव निवासी आरटीआई कार्यकर्ता ‘शम्स तबरेज हाशमी’ ने 20 मई को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में ऑनलाईन आरटीआई दायर करके किसानों के आत्महत्या की रिपोर्ट मांगी जिसका जवाब भारत सरकार के उप सचिव ‘सुशीला अनंत’ 9 जून को भेजा। शम्स तबरेज को भेजी गई सूचना में गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के ताजा आंकड़े जारी किए जो जिसमें बताया गया है कि पूरे देश में 2015-16 में 2990 किसानों ने आत्महत्या किया, जिसमें महाराष्ट्र की देवेन्द्र फड़नवीश सरकार में 1898 किसानों ने आत्महत्या की जिसमें से इस साल की शुरुआती 2 महिने के भीतर 57 किसानों आत्महत्या की। वहीं इस रिपोर्ट में बीजेपी गठबंधन वाली पंजाब दूसरे पायदान पर है जहां 551 किसानों ने अपनी जान दी इस रिपोर्ट में मुताबिक सबसे ज्यादा पंजाब प्रान्त में खेतिहर मजदूर किसानों की हालत बद से बदतर दिखाई गई है जहां आत्महत्या करने वाले किसानों में सर्वाधिक 449 मजदूर तबके के किसान हैं। वही पंजाब में इस साल के शुरुआती 3 महीने में 56 किसाने ने अपनी जान दी। तीसरे पायदान पर तेलंगाना है जहां 345 किसानों किसानो ने खुद की जान ली जिसमें 2016 के मार्च महीनें तक 3 किसानों आत्म हत्या की। चौथे नम्बर पर उड़ीसा है जहां 138 किसानों ने अपनी जान दी। पांचवे पायदान पर कर्नाटक है जहां 1 साल के भीतर 107 किसानों ने आत्महत्या की। वहीं आन्ध्र प्रदेश छठवे पायदान पर है जहां 58 किसानों ने आत्महत्या की। वहीं छत्तीसगढ़, राजस्थान और गुजरात में तीन-ती तथा हरियाणा, केरल और बिहार में एक-एक किसानों ने आत्महत्या किया। सबसे चौकाने वाला दावा उत्तर प्रदेश सरकार का है जो किसी के भी गले नहीं उतर रही। जुलाई 2015 में केन्द्र सरकार को भेजे गए रिपोर्ट में अखिलेश सरकार ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में किसी किसान ने आत्महत्या नहीं की।

(शम्स तबरेज़)
(लेख में दी गयी जानकारी की सिआसत ने व्यक्तिगत पुष्टि नहीं की है और किसी भी त्रुटी के लिए सिआसत हिंदी ज़िम्मेदार नहीं माना जाना चाहिए, लेखक के विचार निजी हैं)

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