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वरुण गांधी ने पेश किया बिल: सांसद, विधायक काम न करें तो जनता को मिले वापस बुलाने का अधिकार

(FILES) In this file picture taken on November 20, 2004 Grandson of late former Indian Prime Minister Indira Gandhi and Bharatiya Janata Party (BJP) member Varun Gandhi delivers his speech during a rally to protest against the arrest of Hindu religious leader Jayendra Saraswathi in New Delhi. The grandson of late Indian prime minister Indira Gandhi came under fire on March 17, 2009 for allegedly inciting violence against Muslims in comments that highlighted the country's religious tensions. Varun Gandhi, who is campaigning for next month's general elections, reportedly told a rally that his Hindu nationalist Bharatiya Janata Party (BJP) would "cut the head of Muslims." AFP PHOTO/Tekee TANWAR (Photo credit should read TEKEE TANWAR/AFP/Getty Images)

भाजपा सांसद वरुण गांधी एक निजी विधेयक संसद में पेश करेंगे जिसके पास हो जाने पर मतदाता को ‘राइट टू रिकॉल’ की ताकत मिल जाएगी और जनता अगर अपने जनप्रतिनिधियों के काम से नाखुश है तो उसे वापस बुला सकेगी। विधेयक के मुताबिक किसी क्षेत्र के 75 प्रतिशत मतदाता अगर अपने सांसद और विधायक के काम से संतुष्ट नहीं हैं तो उन्हें निर्वाचन के दो साल बाद वापस बुलाया जा सकता है। वरुण गांधी के इस विधेयक पर विचार किया जाएगा।
वरुण गांधी ने कहा कि तर्क और न्याय के तहत अगर लोगों को अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार होता है तो उन्हें यह भी अधिकार होना चाहिए कि वे कर्तव्य का निर्वाह नहीं करने या गलत कार्यों में लिप्त होने वाले अपने प्रतिनिधि को वापस बुला सकें। दुनिया के कई देशों में वापस बुलाने के अधिकार के सिद्धांत का प्रयोग किए जाने का जिक्र करते हुए लोकसभा सांसद ने जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 में संशोधन के जरिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम संशोधन विधेयक 2016 का प्रस्ताव दिया है।
विधेयक में यह प्रस्ताव किया गया है कि जन प्रतिनिधियों को वापस बुलाने की प्रक्रिया उस क्षेत्र के कुल मतदाताओं की संख्या के एक चौथाई मतदाताओं के हस्तक्षार के साथ लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर करके शुरू की जा सकती है। हस्ताक्षर की प्रमाणिकता की जांच करके लोकसभा अध्यक्ष उक्त याचिका को पुष्टि के लिए चुनाव आयोग के समक्ष भेजेंगे।

 

वरुण गांधी के प्रस्तावित बिल में कहा गया है कि आयोग हस्ताक्षरों की पुष्टि करेगा और सांसद या विधायक के क्षेत्र में 10 स्थानों पर मतदान कराएगा। अगर तीन चौथाई मत जन प्रतिनिधि को वापस बुलाने के लिए पड़े तब उक्त सदस्य को वापस बुलाया जाएगा। इसमें कहा गया है कि परिणाम प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर स्पीकर इसकी सार्वजनिक अधिसूचना जारी करेंगे और सीट खाली होने के बाद चुनाव आयोग उपचुनाव करा सकता है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव देश के हर नागरिक का अधिकार है और इससे लोगों को अपने प्रतिनिधियों को हटाने का अधिकार प्राप्त हो जाएगा।

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