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भाईचारा और मोहब्बत बढ़ाने के लिए यहाँ हिन्दू-मुस्लिम साथ मिलकर बनाते हैं रमज़ान में सहरी

आधी रात का वक़्त है। हैदराबाद के बोराबंडा इलाके में अभी भी चहल-पहल है। यहां पुलिस गश्ती दल की गाड़ी पर नीली और लाल बत्ती चमक रही है। लोग जानते हैं कि ड्यूटी पर होने के कारण पुलिसकर्मी रात को नहीं सोते हैं। अशरफ जागे हुए हैं। वह कहते हैं कि आधी रात के आसपास सहरी के लिए खाना पकाना शुरू करते हैं।

लगभग हर सुबह करीब 200 लोग यहां सहरी करते हैं और कुछ दिनों में यह संख्या लगभग तीन सौ तक पहुँच जायेगी। सहरी बनाने में मदद करने वाले लोग पहले से ही काम में जुटे हुए हैं। सहरी बनाने के लिए 50 किलो चावल, सब्जियों के साथ लगभग 10 किलो चिकन का इस्तेमाल किया जाता है। उनके सहयोगियों में तीन महिलाएं हैं जिनमें दो हिन्दू हैं और एक ईसाई।

इस बीच, शहर के उपमहापौर मोहम्मद बाबा फसीउद्दीन पीने का पानी और अन्य व्यवस्थाओं की देखरेख करते हैं। सभी सड़क के बीच में कालीन बिछाकर सहरी करते हैं। उनका कहना है कि हम सोच रहे थे कि इस साल रमजान के लिए कुछ अलग क्या कर सकते हैं।

अपने परिवार, मित्रों और अन्य लोगों से बात करने के बाद सांप्रदायिक सद्भाव का तरीका इसके लिए अपनाया गया।

फसीउद्दीन कहते हैं, ‘हम चाहते थे कि इस इलाके के विभिन्न समुदायों के लोगों को साथ मिल सके और मुझे लगता है कि हम उस दिशा में अच्छी शुरुआत कर चुके हैं।’

बोराबंडा इलाके की सभी मस्जिदों में सूचना दे दी जाती है कि सुबह ही बाबा फसीउद्दीन के निवास के सामने मस्जिद में सहरी के गर्म भोजन दिया जाएगा। फसीउद्दीन ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम परिषद में प्रतिनिधित्व करते हैं।

हमने इस इलाके में चार मदरसों में भी बताया है कि यहां सहरी की व्यवस्था है, विशेषकर वहां जहां प्रवासी श्रमिक रहते हैं। डिप्टी मेयर कहते हैं कि उनके एक पुराने सहपाठी नवीन राव इस काम में बहुत मदद करते हैं। यहां लोग बिना झिझक के सहर करने के लिए आते हैं।

 

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