Thursday , October 19 2017
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गुस्से में ब्राह्मण ने गाय मारी तो मिली गंगा नहाने-भोज कराने की सज़ा, लोग बोले- मुस्लिम या दलित होता तो?

गौरक्षा के नाम पर हमारा समाज मज़हब और जाति को लेकर सेलेक्टिव हो गया है। यानी गाय पर अत्याचार करने वाला अगर ऊँची जाति का हो तो उसे धार्मिक कर्मकांड करके ‘पाप’ से मुक्ति पाने का अधिकार है।

लेकिन अगर बात अल्पसंख्यक, पिछड़े या दलितों की आ जाए, तो भीड़तंत्र में तब्दील होता समाज लिंचिंग करने पर उतारू रहता है।

बहरहाल अब इसी तरह की एक घटना मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में देखने को मिली है।

दरअसल हुआ कुछ यूँ कि यहाँ दुम्बर गांव में मोहन तिवारी ने गुस्से में आकर पिछड़ी जाति के एक शख्स की गाय को जान से मार दिया।

गाय अक्सर उसके खेत में घुस जाती थी इसलिए मोहन ने उसकी किसी धारदार चीज से मारकर हत्या कर दी।

बाद इसके जब इसकी खबर गाँव वालों को हुई तो पंचायत बैठी. इसमें मोहन को ‘पाप’ से मुक्ति के लिए गंगा नहाने और भोज कराने का फरमान जारी किया गया।

इस मामले में इंस्पेक्टर कैलाश बाबू आर्य ने बताया कि शंकर अहीरवार ने इस मामले की शिकायत पुलिस में बजरंग दल कार्यकर्ताओं के दबाव डालने के बाद दर्ज कराई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक फैसला हो जाने के बाद शंकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का इच्छुक नहीं था।

आर्य ने आगे बताया कि गाय का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद यह पता चला कि उसकी मौत घायल होने से हुई थी। इसके बाद ही तिवारी के खिलाफ मध्य प्रदेश गौ-वध प्रतिबंध कानून (Madhya Pradesh Prohibition of Cow Slaughter Act) के तहत मामला दर्ज किया गया।

 

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