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कैग की रिपोर्ट: धीमी ट्रेन को सुपरफास्ट बताकर भारतीय रेलवे यात्रियों से वसूल रहा ज़्यादा किराया

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे में धीमी ट्रैन के सफर के लिए भी लोगों से सुपरफास्ट ट्रैन का किराया वसूला जा रहा है।
इस बात का खुलासा कैग ने किया है।
आजतक की एक रिपोर्ट के अनुसार कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि साल 2013 से लेकर 2016 तक भारतीय रेलवे द्वारा सुपरफास्ट सरचार्ज के नाम पर यात्रियों से 11 करोड़ 17 लाख रुपये वसूले गए हैं।

21 जुलाई को पेश की गई कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ सुपरफास्ट ट्रेनें 95 प्रतिशत से ज़्यादा बार लेट हुईं हैं। भारतीय रेलवे द्वारा चलाई जा रही 21 सुपरफास्ट ट्रेन अपने संचालन के 16,804 दिनों में से 3,000 दिन देरी से पहुंची हैं।

साल 2006 में भारतीय रेलवे ने एक सर्कुलर निकाला था, भारतीय रेलवे ने 2006 में एक सर्कुलर निकाला था, जिसमें यात्रियों से सुपरफास्ट सरचार्ज वसूलने के लिए मापदंड तय किया गया था।

रेलवे की किसी भी ट्रेन को रफ़्तार अगर 55 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे ज्यादा हो तो उसे सुपरफास्ट क्लास में रखा जाता है।
1 अप्रैल, 2013 से
सुपरफास्ट सरचार्ज जनरल क्लास के लिए 15 रुपये, स्लीपर के लिए 30 रुपये, चैरकार, ऐसी-3, ऐसी-2 के लिए 45 रुपये और प्रथम श्रेणी ऐसी के लिए 75 रुपये वसूले जाते हैं।

 

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