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CBI की पकड़ में आए देश के टॉप विलफुल डिफॉल्टर

बैंकों और दूसरी संस्थाओं से करीब 2,500 करोड़ रुपए का कर्ज लेकर विलफुल (जान-बूझकर कर्ज नहीं लौटाने वाले) डिफॉल्टर कैलाश अग्रवाल को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। कैलाश अग्रवाल वरुण इंडस्ट्रीज के को-प्रोमोटर हैं।

खबर के अनुसार उन्हें बीते सप्ताह सीबीआई ने एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है। गौरतलब है कि कैलाश देश के टॉप 10 विलफुल डिफॉल्टरों में शामिल हैं। जो अपने बिजनेस पार्टनर किरण मेहता के साथ देश से बाहर चले गए थे।

बीती पांच अगस्त (2017) दोनों आरोपी जब दुबई से लौटे तो सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया। जहां से स्थानीय अदालत ने उन्हें रिमांड पर भेज दिया है।

बता दें कि अग्रवाल और मेहता पर आरोप है कि उन्होंने चेन्नई के इंडियन बैंक से 330 करोड़, अन्य बैंकों से भी 1,593 करोड़ रुपए लिए हैं। मामले में सीबीआई के प्रवक्ता आरके गौड़ ने बताया कि दोनों भागे हुए थे और लगातार जांच से बच रहे थे।

अधिकारियों के अनुसार मेहत और अग्रवाल ने साल 2007 से साल 2012 के बीच इंडियन बैंक और दूसरे पब्लिक सेक्टर के बैंकों से लोन लिए। साल 2013 में ये डिफॉल्टर होने लगे। दोनों ने शेयर्स के बदले मार्केट से काफी पैसा भी उठाया।

सीबीआई के अनुसार पिछले साल इंडियन बैंक की शिकायत पर वरुण इंडस्ट्रीज के खिलाफ केस दर्ज किया गया। अग्रवाल और मेहता के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया।

ऑल इंडिया बैंक एंप्लायीज असोसिएशन द्वारा तैयार विलफुल डिफॉल्टर्स की लिस्ट के अनुसार वरुण इंडस्ट्रीज और इसकी सहयोगी कंपनी वरुण जूल्स पर 10 सरकारी बैंकों का करीब 1,242 करोड़ रुपए का बकाया था। साथ ही कंपनी ने निजी बैंकों और फाईनेंस कंपनियों से भी लोन ले रखा था। साल 2015 में कंपनी को देश पहली विलफुल डिफॉल्टर कंपनी घोषित किया गया था।

इस लिस्ट में हीरा कारोबारी का नाम भी शामल है, जिनपर करीब सात हजार करोड़ रुपए का कर्ज है।

 

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