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डॉक्टर बनने के लिए केंद्र सरकार से लड़ रही दलित छात्रा ने की ख़ुदकुशी

चेन्नई: मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरी की पढाई में एडमिशन के लिए जरूरी नीट परीक्षा का विरोध कर रही दलित छात्रा एस अनिता ने आज खुदकुशी कर ली है।

दरअसल इस मामले में केंद्र की मोदी सरकार विरोध कर रही अनिता तब हिम्मत हार गई, जब सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल में एडमिशन लेने के लिए सभी राज्यों को नीट की परीक्षा जारी रखने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला २२ अगस्त को सुनाया है। जिसके बाद केंद्र सरकार ने भी कहा था कि इस मामले में तमिलनाडु को छूट नहीं दी जा सकती।
एस अनीता ने मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया था और अदालत में इसे चुनौती दी थी।

आपको बता दें की नीट ने एआईपीएमटी या राज्य के मेडिकल कॉलेजों द्वारा कराई जाने वाली परीक्षा की जगह ली है।
तमिलनाडु में नीट परीक्षा के खिलाफ बड़े स्तर पर राजनीतिक पार्टियों में सहमति है कि इससे राज्य के छात्रों को अस्थायी तौर पर राहत की मांग की गई थी।
गौरतलब है कि अनीता ने बारहवीं में 1200 में से 1176 अंक हासिल किये थे। उसने इंजीनियरिंग के लिए कट ऑफ मार्क्स के 199.75 और मेडिकल के लिए कट ऑफ मार्क्स के 196.75 अंक हासिल किये थे। उसे मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी ने एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग ने अपने यहां एक सीट भी ऑफर किया था, लेकिन अनीता डॉक्टर बनना चाहती थी।
अनीता ने नीट की परीक्षा भी दी थी, लेकिन उसे पास नहीं कर पाई थी।

 

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