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CJI की 40 हजार जजों की मांग मोदी सरकार ने किया खारिज

NEW DELHI, DEC 3 (UNI):-President Pranab Mukherjee administering the oath of office of Chief Justice of India to Justice T S Thakur (R) at a Swearing in Ceremony, at Rashtrapati Bhavan, in New Delhi on Thursday. UNI PHOTO-11U

केंद्र सरकार ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया टीएस ठाकुर द्वारा देश में लंबित पड़े तीन करोड़ से ज्यादा केसों के लिए 40,000 जजों की जरूरत बताने से ये कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि उनके इस बयान के पीछे कोई साइंटिफिक रिसर्च या डाटा नहीं है।

बीती आठ मई को 1987 लॉ कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर CJI ने कहा था कि न्यायपालिका को पेंडिंग पड़े करोड़ों केसों को निपटाने के लिए 40,000 जजों की जरूरत है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, इस मामले पर कानून मंत्री वी सदानंद गौड़ा ने कहा कि कमीशन की रिपोर्ट सिर्फ विशेषज्ञों की राय पर आधारित थी।

उन्होंने कहा, ‘1987 लॉ कमीशन की रिपोर्ट विशेषज्ञों और आम लोगों की राय पर आधारित थी। अभी तक कोई साइंटिफिक डाटा नहीं उपलब्ध है, इसलिए हम इस पर ज्यादा नहीं बोल सकते।

उन्होंने कहा कि अभी भारत में एक मिलियन जनसंख्या पर 10.5 जज हैं, ये संख्या दुनिया में सबसे कम में से एक है। 1987 में लॉ कमीशन ने रिकमेंड किया था कि एक मिलियन जनसंख्या पर कम से कम 40 जज होने चाहिए। 2014 में कमीशन ने अपनी 245वीं रिपोर्ट में कहा कि एक मिलियन आबादी पर 50 जज होने चाहिए।

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