Friday , June 23 2017
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बांसवाड़ा में दंगा तो रुक गया, लेकिन सैकड़ों मुस्लिम परिवारों की छिन चुकी है रोज़ी-रोटी और घर

राजस्थान के बांसवाड़ा में हुए दो पक्षों के बीच विवाद को अब एक हफ्ता होने को है। फिलहाल शहर में कर्फ्यू लगा हुआ है।

हालाँकि आज पांचवे दिन करीब सात घंटे की ढील दी गई लेकिन फिर कर्फ्यू लगा दिया गया। इंटरनेट सेवाएं अब भी बंद रखी गई हैं और पेट्रोल पम्प भी बंद हैं।

इस बीच ख़बर यह भी है कि इस दंगे में लुटे-पिटे लोगों की न तो प्रशासन सुध ले रहा है और न ही जनप्रतिनिधियों को पीड़ितों के दर्द और तड़प का एहसास है।

बहरहाल, यह दर्द दोनों समुदायों के खांटवाड़ा और कालिका माता क्षेत्र के उपद्रव पीड़ितों का है जो फिलहाल जान बचाकर अलग-अलग जगह पर शरण लिए हुए हैं।

खांटवाड़ा के मेहबूब खां ने बताया, ‘हम जुम्मे की नमाज की तैयारी कर रहे थे कि कुछ लोग घरों में घुस गए और जो हाथ में आया उससे ही वार करने लगे और बाद में घर को आग लगा दी। जिससे सामान खाक हो गया।’

इन दंगों के भेंट चढ़ीं फरीदा ने बताया कि उपद्रवियों ने घर में आग लगा दी जिससे घर के सामान के साथ मोटरसाइकिल भी खाक हो गई। पूरे घर में धुआं हो गया जिससे तीन माह की बच्ची का सांस घुटने लगा। न बाहर जा सकते थे और न ही नीचे उतर सकते थे। तब छत से कूदे और जान बचाई।

फरीदा ने आगे बताया कि मेरा एक बेटा अभी तक घर नहीं पहुंचा है और न ही उसका कोई सुराग भी नहीं लग रहा है।

पनाह देने वाले सोयब खां और फिरदोज खां ने बताया कि दो-तीन दिन से यहां करीब 150 से अधिक लोग रह रहे हैं और सुरक्षा के साथ खाने की व्यवस्था की जा रही है।

पनाह लेने वालों में सुमैय्या भी और नदीम भी हैं जिनका निकाह उसी दिन होने वाला था जिस दिन दंगा शुरू हुआ।

सुमैय्या के कहा कि दोपहर 12 बजे तक घर में खुशियां छाई हुई थी, लेकिन जैसे ही दंगें भड़कने की सूचना मिली वैसे ही घर की फिजा बदल गई और कुछ ही देर में उसके सपने चूर-चूर हो गए। सभी को जान बचाकर वहां से भागना पड़ा। नदीम के घर के भी यही हाल हुए।

 

 

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