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अदालत ने पुलिस के एनकाउंटर विशेषज्ञ को किया बरी

जम्मू। जम्मू की एक अदालत ने डोडा इलाके में कथित रूप से एक आतंकवादी समूह काे संचालित करने के आरोप में गिरफ्तार किये गये जम्मू कश्मीर पुलिस के एक मुठभेड़ विशेषज्ञ को बरी कर दिया। भादरवाह के प्रधान सत्र न्यायाधीश एम के शर्मा ने ‘मुठभेड़ विशेषज्ञ’ उप निरीक्षक शिव कृष्ण शर्मा उर्फ सोनू को रिहा करने का आदेश दिया। मुठभेड़ विशेषज्ञ ने डोडा-किश्तवार इलाके में 68 आतंकवादियों को मार गिराया था।

उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायाधीश ने खारिज कर दिया तथा कहा कि यह एक ऐसा मामला है जिसमें पुलिस ने आरोपी लोगों के खिलाफ विभिन्न आरोपों की स्थापना के लिए 93 गवाहों का हवाला दिया। हैरानी की बात है कि कुछ पुलिसकर्मियों और इलाके के सम्माननीय लोगों सहित अधिकांश गवाहों ने विरोध किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जांच के दौरान आरोपी के खिलाफ बयान देने पर धमकी दी और हिरासत में लिया गया। यह भी कहा गया है कि इनमें से 15 गवाहों में से 9 की धारा 164 के अंतर्गत आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत जांच की गई। यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने या अभियोजन चलाने के लिए पुलिस की शक्ति को विवेकपूर्ण तरीके से प्रयोग किया जाना चाहिए, न कि मनमाने ढंग से। इस मामले में अन्य आरोपी सुनु, पीएसओ मोहम्मद अयूब, अब्दुल रशीद, अल्ताफ हुसैन, मोहम्मद रफी, मोहम्मद याकूब और अर्शद अहमद भी शामिल थे।

पुलिस के अनुसार शिव कुमार उर्फ ​​सोनू ने अपने पीएसओ मोहम्मद अयूब और अन्य आरोपी अरशद अहमद और मोहम्मद आरिफ नाइक के साथ मिलकर दो कश्मीरी लड़कों को आतंकवादी संगठन में शामिल करने की साजिश रची। लड़कों की पहचान मुजफ्फर अहमद और शाहबाज, दोनों पुलवामा के निवासियों के रूप में की गई है।

14 अप्रैल 2013 को शिवकुमार ने किश्तवार को अब्दुल रशीद को फोन किया और अगली सुबह उन्हें एक पिस्तौल और एक ए के 56 राइफल को गोला-बारूद के साथ तीन चीनी हथगोले दिए। रशीद ने रफी, अख्तर हुसैन, शाहबाज और मुजफ्फर के बीच पिस्टल, ए के 56 राइफल और ग्रेनेड वितरित किए।

उसके बाद पांच दिन बाद अब्दुल रशीद ने मोहम्मद अलताफ से राज्य के मुख्य सचिव पर एक ग्रेनेड फेंक दिया जो किश्तवार से लौट रहा था। हालांकि, अल्ताफ ने 27 अप्रैल, 2013 की मध्य रात पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड फेंका था जो विस्फोट नहीं हुआ। जांच के दौरान मोहम्मद रफी को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्होंने पूरी कहानी पुलिस को सुनाई।

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