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करोड़ों रुपए दान मिलने के बावजूद 5 महीने में भुखमरी से इस गौशाला में 152 गाएं मर गईं

संघ, भाजपा और इनसे जुड़े हिंदूवादी संगठनों के गुंडे गौरक्षा के नाम पर पहलू खान को पीट-पीटकर मार देते हैं लेकिन देश की गौशालाओं में चारे के अभाव में मर रही गायों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कानपुर की वो गौशाला जो देश की सबसे धनी गौशाला है।

हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक, इस गौशाला में एक चौथाई गायें पिछले पांच महीने में मर चुकी हैं, जबकि आधी गायें बीमार हैं। इस गौशाला को जो सोसायटी चलाती है वह 220 करोड़ की संपत्ति की मालिक है। यहां कुछ ही महीने पहले तक 540 गायें थी इसमें से 152 गायें मर चुकी हैं। इनमें से 4 गायों की मौत तो पिछले सप्ताह ही हुई है।

इन गायों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि इनकी मौत चारे और पानी के अभाव में हुई है। स्थानीय लोग सोसायटी के सदस्यों से पूछ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी रकम कहाँ चली गई?

सोसायटी के एक सदस्य ने बताया कि गौशाला कानपुर के नामी गिरामी व्यक्ति चलाते हैं और हर साल करोड़ों रुपये दान में मिलता है, लेकिन ये पैसा कहां जाता है कोई नहीं जानता, इस बात की जांच होनी चाहिए। इस सप्ताह हुई चार मौतों के बाद जब गायों का पोस्टमार्टम किया गया तो गायों के पेट खाली थे और उनके मूत्राशय में पानी था ही नहीं।

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने कहा ये गायें खून की कमी से पीड़ित थीं और इन्हें बहुत दिनों से पोषणयुक्त चारा नहीं मिला था।

हालांकि सोसायटी के महासचिव श्याम अरोड़ा गायों के पालन पोषण में किसी तरह की लापरवाही को खारिज करते हैं। उनका कहना है कि रोजाना 18 क्विटंल सूखा चारा और 20 क्विंटल हरा चारा जानवरों के लिए लाया जाता है।

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