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BJP शासित राज्यों ने कोर्ट में नहीं दाखिल किया गौरक्षकों की हिंसा का जवाब, अब जुलाई में होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने गौरक्षा नाम पर हिंसा के मामले में संबंधित राज्यों के पुलिस अधिकारियों से जवाब तलब करने और उन्हें जिम्मेदार ठहराने से संबंधित आवेदन पर आज मामले की सुनवाई छह सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कांग्रेसी नेता तहसीन पुणे वाला और दो अन्य आवेदकों की याचिका पर सुनवाई अगले महीने तक टालते हुए कहा कि इस मामले में हम फ़िलहाल कोई आदेश जारी नहीं करेंगे।

अदालत ने कहा कि इस मामले में प्रतिवादी बनाई गए छह में से पांच राज्य सरकारों ने अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया। ऐसे में खुद कोई कयास नहीं लगाया जा सकता।

आवेदकों की ओर से वरिष्ठ एडवोकेट संजय हेगड़े ने दलील दी कि गौरक्षक दल की हिंसा के लिए सीधे तौर पर पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और झारखंड सहित पांच राज्यों को 6 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने गौरक्षकों की हिंसा से सम्बंधित दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए छह राज्यों को नोटिस जारी किया था।

जिसका अनुपालन करते हुए अब तक केवल कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक की सरकार की ओर से जवाब दाखिल किया गया है। जिसमें कहा गया है सरकार गौरक्षा के नाम पर किसी गैर कानूनी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।

वहीँ, भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और झारखंड की सरकारों ने अब तक अदालत के नोटिस का जवाब नहीं दिया है। मामले की सुनवाई अब जुलाई में होगी।

 

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