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संघ कार्यकर्ता ने दैनिक जागरण के एक्जिट पोल में भाजपा को आगे दिखाने की चाल चली थी

नई दिल्ली। यूपी चुनाव के पहले चरण के मतदान के तुरंत बाद चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन करते हुए दैनिक जागरण ने एक एक्जिट पोल अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया था। इस सर्वे में भाजपा को दूसरे राजनीतिक दलों से आगे दिखाया गया था। वहीं इस सर्वे को बीजेपी और आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने सूबे भर में व्हाट्सएप के ज़रिए वायरल भी किया था।

अब इस पर ‘दि वायर’ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसके मुताबिक़ इसका मास्टरमाइंड राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक कार्यकर्त्ता है।

यूँ तो ये बात साफ है कि ‘एक्जिट पोल’ यूपी चुनावों में भाजपा की संभावनाओं को बढ़ाने की रणनीति पर आधारित था लेकिन इसके पीछे कौन था, यह रहस्य बना हुआ था। इस मामले में चुनाव आयोग की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने दैनिक जागरण की वेबसाइट के ऑनलाइन संपादक शेखर त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया और उनपर लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126ए व 126बी के उल्लंघन और भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया।

अख़बार के सीईओ संजय गुप्ता ने स्वीकार किया था कि यह सर्वे हमारे विज्ञापन विभाग ने प्रकाशित किया था। अब यह बात सामने आई है कि विवादास्पद सर्वे जागरण प्रकाशन और एमएमआई ऑनलाइन लि. को तन्मय शंकर ने बिजनेस एंड मार्केटिंग प्रमुख सुकृति गुप्ता की मंजूरी के साथ प्रकाशित हुआ था। जागरण के विभिन्न संपादकीय विभागों को एक ईमेल भेजकर 10 फरवरी को तन्मय शंकर ने निर्देश दिया था कि यह प्री-पोल विश्लेषण पी 1 स्लॉट पर चलाना है।

अपने ईमेल में शंकर ने http://rdiindia.com के रूप में सर्वेक्षण के स्रोत का उल्लेख किया। उन्हें ईमेल [email protected] से आया है जिसको सुनील आर ने भेजा है। यूआरएल गुडग़ांव में एक मानव संसाधन प्रबंधन फर्म संसाधन विकास इंटरनेशनल से संबंधित है, जिसके पास चुनाव सर्वेक्षण से सम्बद्ध कुछ भी नहीं है। आरडीआई एक अन्य कंपनी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट इनिशिएटिव में यूआरएल http://rdiindia.org के साथ आम है, जिसने न केवल अतीत में चुनाव सर्वेक्षण किया है बल्कि जिनके प्रवर्तक देवेंद्र कुमार ने अरुण जेटली और वसुंधरा राजे जैसे भाजपा नेताओं के साथ पूर्व में काम किया है।

हालांकि, चुनाव आयोग की शिकायत में संसाधन विकास इंटरनेशनल के प्रमुख राजीव गुप्त ने शिकायत से इंकार किया और ईसी के अधिकारियों ने पृष्ठभूमि पर स्वीकार किया कि दैनिक जागरण ने स्पष्ट रूप से कंपनी की गलत पहचान की। रिसर्च एंड डेवलपमेंट इनिशिएटिव के देवेंद्र कुमार ने वायर को बताया कि उन्हें जागरण चुनाव के बारे में कुछ नहीं पता है और उनकी कंपनी इस मामले में शामिल नहीं थी।

ऐसे में जाहिर है तन्मय शंकर के साथ मिलकर ये झूठ बोल रहे हैं। सुनील आर’ के पूरे नाम के बारे में पूछे जाने पर (वह व्यक्ति जिसने उन्हें चुना था, उन्होंने दैनिक जागरण के संपादकीय विभाग को भेजा था) शंकर ने वायर को बताया कि उन्हें इसके बारे में कुछ नहीं पता था। न ही वह समझा सकता था कि उसने अपने ईमेल में मतदान एजेंसी के रूप में http://rdiindia.com का उल्लेख क्यों किया था।

रिसर्च एंड डेवलपमेंट इनिशिएटिव के कार्यालय में फोन करके भी सुनील आर के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।

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