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दिल्ली बम धमाके में 67 लोगों के साथ बेगुनाह छूटे रफीक और हुसैन की भी ज़िन्दगी ख़त्म हुई

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2005 में दिवाली की पूर्व संध्या पर शहर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में गुरूवार को दो आरोपियों को बरी कर दिया।

इन बम धमाकों में 67 लोग नहीं बल्कि हकीक़त में कुल 69 लोग मारे गए जिसमें दो कश्मीरी भी शामिल है जिन्हें अदालत ने सबूत न मिलने के बाद सभी आरोपों से बरी कर दिया।

मोहम्मद रफीक शाह और मोहम्मद हुसैन ने बेगुनाह होते हुए भी 11 साल जेल में काटे। उनका कहना था कि उनको मुसलमान होने की सजा मिली है।

अदालत ने इस मामले के एक और आरोपी तारिक अहमद दर को एक आतंकवादी संगठन का सदस्य होने और उसे समर्थन देने के जुर्म में दोषी करार दिया।

दर को अब जेल में नहीं रहेगा क्योंकि वह पहले ही 10 साल से ज्यादा सजा काट चुका है। उसको जिन धाराओं के तहत दोषी करार दिया गया, उनमें सिर्फ 10 साल की सजा का ही प्रावधान है।

गौरतलब है कि दिल्ली के सरोजिनी नगर, पहाड़गंज और कालकाजी में 29 अक्तूबर 2005 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 67 लोग मारे गए थे और 225 से ज्यादा जख्मी हो गए थे।

फारुक अहमद बटलू और गुलाम अहमद खान ने पहले अपना जुर्म स्वीकार किया था और अदालत ने उनकी ओर से पहले ही जेल में बिताए गए समय के मद्देनजर उन्हें रिहा कर दिया।

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