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पुरानी दिल्ली के 11 उर्दू स्कूलों को 6 स्कूलों में मर्ज करने का फैसला, जनता नाराज़

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने एक परिपत्र जारी कर पुरानी दिल्ली के 12 स्कूलों को 6 स्कूलों में मर्ज करने का फैसला किया है। जिसके बाद से पुरानी दिल्ली के लोगों में काफी नाराजगी पाई जा रही है। सरकार द्वारा स्कूलों को नोटिस भेजने के बाद ही पुरानी दिल्ली के लोग दिल्ली सरकार के ज़िम्मेदारों से इस फैसले पर फिर से विचार करने की मांग कर रहे हैं।

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दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने पुरानी दिल्ली की उर्दू मीडियम स्कूलों के एकीकरण के लिए पिछले दिनों एक परिपत्र जारी कर उर्दू के चाहने वालों के दिल में बेचैनी पैदा कर दी है।

विभाग ने 12 स्कूलों की एक सूची जारी की है, जिसमें से एक हिंदी मीडियम और 11 उर्दू मीडियम स्कूलों को 6 स्कूलों में मर्ज करने का फैसला किया गया है। इन सभी स्कूलों में से केवल दो स्कूल लड़कों के हैं, जबकि बाकी 10 स्कूल लड़कियों के हैं।स्कूलों को मर्ज करने के लिए भेजे गए नोटिस के पीछे जब कारण जानने की कोशिश की गई तो पता चला कि दिल्ली सरकार द्वारा स्कूलों को बंद करने के कारण कानूनी रूप से कमजोर है।

दरअसल स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या कम बताकर इन स्कूलों को एकीकृत करने की कोशिश की जा रही है, जबकि स्कूलों में स्थायी रूप से कक्षा करने आ रहे छात्रों की संख्या सैकड़ों में है।

आपको बता दें कि पिछले 40 सालों से पुरानी दिल्ली में कोई नया सरकारी स्कूल नहीं खोला गया है। लेकिन पिछले 2 वर्षों में लगभग 25 एमसीडी या अन्य सरकारी स्कूलों को बंद किया जा चुका है। जिनमें हजारों छात्र छात्राएं पढ़ने के लिए आते थे और लगभग सभी स्कूल उर्दू मीडियम के थे।

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