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अरब में रहने वाले भारतीय मुसलमानों से अपील: शादी में फ़िज़ूलखर्ची ना करें

रियाद। सामाजिक कार्यकर्ता अलीम खान फलाकी ने भारतीय समुदाय से अपील की है कि वे भारी-भरकम शादियों और दहेज का बहिष्कार करने के लिए आगे आएं क्योंकि इससे समुदाय के लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दहेज और शादी में रात्रिभोज भ्रष्टाचार का ही एक रूप हैं। यहां विभिन्न कार्यक्रमों में फलाकी ने भारतीय समुदाय को संबोधित किया और शादियों में गैर इस्लामिक सामाजिक बुराइयों पर रोशनी डाली।

 

 

 

 

 

उन्होंने सफलतापूर्वक कई लोगों को ऐसी शादी से बचने और उनका बहिष्कार करने का आश्वासन लिया। इस दौरान पच्चीस सदस्यों ने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करके प्रतिज्ञा ली कि वे ऐसे विवाहों का बहिष्कार करेंगे और अपने मित्रों और रिश्तेदारों को इससे बचने और इनका उन्मूलन करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने नियागरा हॉल में तेलंगाना एनआरआई फोरम द्वारा आयोजित ‘एंटी दहेज’ आयोजन में एक भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया।

 

 

 

अगले दिन उन्होंने अब्दुलरहमान सलीम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत की और तीसरे दिन कोको पाम रेस्तरां में समुदाय के सदस्यों की एक और सभा में भाग लिया। उन्होंने कहा कि समुदाय में शादियों की वर्तमान व्यवस्था में होने वाला भारी खर्च न केवल इस्लाम के खिलाफ है बल्कि भारतीय संविधान का खुला उल्लंघन भी है। फालकी ने कहा कि ऐसी शादियां कई बुराइयों का मूल कारण है जो हर किसी को आर्थिक और नैतिक रूप से नुक्सान पहुंचाती है।

 

 

 

इस्लाम ने दहेज पर रोक लगाई है लेकिन यह परंपरा भारत में मुसलमानों के बीच तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि समुदाय को इस सामाजिक बुराई के प्रति जगाने और दहेज के खिलाफ आवाज उठाने की महती आवश्यकता है। फालकी ने कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद समाज में बदलाव लाने का एकमात्र समाधान इस्लाम की तालीम को आम करना है।

 

 

उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत काजी मुजाहिदुल इस्लाम क़ासमी और पाकिस्तान के डॉ. इसरार अहमद के साथ इस मुद्दे पर चर्चा के बाद उन्होंने इस कदम को उठाया है क्योंकि वे भी दहेज के खिलाफ थे। उन्होंने कहा कि कुछ नौजवानों को साथ लेकर उन्होंने मुस्लिम समाज में सुधार का बीड़ा उठाया है और हम तीन मोर्चों पर काम कर रहे हैं जिसमें दहेज प्रणाली का उन्मूलन और दुल्हन के माता-पिता पर थोपे जाने वाले भोजन का खर्च, तलाक की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए सलाहकारों को तैयार करने और इमारत-ए-शरिया बिहार जैसी इस्लामी अदालतों को पुनर्जीवित करना शामिल हैं।

 

 

 

 

इस मौके पर एयर इंडिया के एजीएम कुंदन लाल कोतवाल ने कहा कि भारतीय विवाह के प्रारूप को बदलने का सही समय है। उन्होंने सामाजिक सुधारों के लिए सही दिशा में किए गए कार्यों की सराहना की। अनेक माता-पिता बड़ा दहेज मांग रहे हैं। अब समय बदल गया है क्योंकि भारत में अभिभावकों के लिए विवाह आसान होते जा रहे हैं। हिंदुस्तानी बज्मे उर्दू के अध्यक्ष सलीम ने कहा कि सभी अनिवासी भारतीय अलीम खान के सामाजिक कामों में सहायता के लिए तैयार हैं।

 
डॉ मोहम्मद अशरफ अली, मोहम्मद फारूकी शाबाज, डॉ. अहमद दिलशाद, शमसुद्दीन, निजामुद्दीन अफ़रोज़ ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे। अलीम खान फलाकी अफरोज़ के निमंत्रण पर रियाद आए थे। इससे पहले हाफिज ख्वाजा अलीमुद्दीन ने पवित्र कुरान का पाठ किया। तेलंगाना एनआरआई फोरम के अध्यक्ष मोहम्मद जब्बार ने सभी आगंतुकों स्वागत करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। टीएम मोहम्मद मुबीन ने सञ्चालन किया जबकि जब्बार ने अलीम खान फालकी का सम्मान किया।

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