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नीदरलैंड्स में इस्लाम विरोधी पार्टी को झटका, ईवीएम हैकिंग की सम्भावना के बाद बैलेट पेपर पर हुई वोटिंग

प्रवासी विरोधी गीर्ट वाइल्डर्स (बाएं) प्रधानमंत्री मार्क रूट (दाएं)

भारत ही नहीं नीदरलैंड्स में भी ईवीएम मशीन को लेकर विवाद चल रहा है। नीदरलैंड्स में चुनावी विशेषज्ञों के तरफ से ईवीएम हैकिंग की सम्भावना के बाद यहां बैलेट पेपर पर बुधवार को मतदान हुआ। इसके लिए मतदाताओं को लाल बॉल पेन का इस्तेमाल करना था।

खबरों के मुताबिक, नीदरलैंड्स में प्रधानमंत्री मार्क रूट की पार्टी को सबसे अधिक मिलने जा रहा है। एक्जीट पोल में बताया गया है कि मार्क रूट की मध्य-दक्षिणपंथी वीवीडी पार्टी को 150 में से 31 सीटें मिल सकती हैं।

नीदरलैंड्स में तीन मुख्य पार्टियां हैं- फ्रीडम पार्टी (पीवीवी), द क्रिश्चियन डेमोक्रेट पार्टी और द लिबरल पार्टी। इसमें से फ्रीडम पार्टी प्रवासी विरोधी रही है। गीर्ट वाइल्डर्स की यह पार्टी इस्लाम विरोधी रवैये के लिए जानी जाती है। यह पार्टी शुरूआती ओपीनियन पोल में सबसे आगे चल रही थी लेकिन अभी आए पोल में उसे झटका लगा है।

बता दें कि गीर्ट वाइल्डर्स की इस प्रवासी विरोधी पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान नीदरलैंड्स में मस्जिदों और कुरान को प्रतिबंधित करने का वादा किया था। बुधवार को हुए चुनाव में विशेषज्ञों का अनुमान लगाया कि यहां 80 प्रतिशत से अधिक मतदान हुए हैं। उनका मानना है कि इस भारी मतदान का सीधा फायदा यूरोपीय संघ समर्थक और लिबरल पार्टियों को होगा।

हालांकि सरकार बनाने के लिए फ्रीडम पार्टी को दूसरे दलों से गठजोड़ करना पड़ सकता है। इस पार्टी को बहुमत हासिल करने के लिए कम-से-कम तीन अन्य पार्टियों को साथ ले पड़ेगा। देखा जाए तो नीदरलैंड्स के चुनाव पर यूरोपियों देशों की पैनी नजर थी।

बताया जा रहा है कि जिस तरह से यूरोपिय देशों में दक्षिणपंथी पार्टियां सरकार में आ रही हैं उसका असर अगले महीने होने वाले फ्रांस के राष्ट्रपति चुनावों पर भी पड़ेगा।

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