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जामिया का आज़ादी की लड़ाई में अहम रोल था, इसलिए यूनिवर्सिटी को अहिंसा की निशानी बताया गया: डॉ नजमा हेपतुल्ला

डॉ नजमा हेपतुल्ला बतौर कुलपति पहली बार जामिया मिलिया इस्लामिया आईं।

इस दौरान नजमा हेपतुल्ला ने यूनिवर्सिटी में 102 फुट ऊंचे तिरंगे, परम वीर चक्र से सम्मानित किए गए नायकों की तस्वीरों वाले ‘वॉल आफ हीरोज’ और इस संस्था के संस्थापकों की तस्वीर वाले ‘वॉल ऑफ फाउंडर्स’ का उद्घाटन किया।

यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, इस मौके पर हेपतुल्लाह की आखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि जामिया की स्थापना आज़ादी से वाबस्ता है और इसीलिए इसे अहिंसा की निशानी बताया गया।

हेपतुल्लाह ने कहा कि जामिया अपनी इस परंपरा को अब तक बाकी रखे हुए है, जिस पर हमें गर्व है।

इस यूनिवर्सिटी की पहली महिला चांसलर ने कहा कि जामिया मिलिया राष्ट्रवादी आंदोलन अभियान का हिस्सा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आह्वान पर ब्रिटिश शिक्षा के खिलाफ राष्ट्रवादियों ने उसकी नींव रखी थी, जिसके संस्थापक स्वतंत्रता आंदोलन के महान नेता मौलाना मोहम्मद अली जोहर थे।

उन्होंने बुलबुले भारत सरोजिनी नायडू के जामिया से संबंध के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि वह वे करती थीं कि जामिया के संस्थापकों ने महात्मा गांधी की एक पुकार पर तिनका तिनका जोड़ कर जामिया के रूप में क़ुरबानी की अनमोल मिसाल कायम की है।

उन्होंने कहा कि जामिया का मतलब ज्ञान निवास होता है और मिलिया मतलब राष्ट्रवाद, जामिया इन दोनों का हसीन संगम है।

 

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