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EVM को यूपी चुनाव आयोग ने नकारा,बैलेट पेपर से चुनाव का दिया सुझाव

लखनऊ- उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को भारी जीत मिलने के बाद से ही विरोधी पार्टियां ईवीएम की विश्वनियता पर सवाल उठा रही हैं । राज्य निर्वाचन आयोग ने भी ईवीएम को लेकर सवाल उठा दिया है, राज्य निर्वाचन आयोग नगर निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने की तैयारी में है। यूपी के राज्य निर्वाचन आयोग ने ईवीएम को लेकर भारत निर्वाचन आयोग को चिट्ठी लिखी है,राज्य निर्वाचन आयोग ने पुरानी ईवीएम के इस्तेमाल को खारिज कर दिया है और निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने का सुझाव दिया है।

यूपी चुनाव आयोग ने केंद्रीय चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर कहा है कि 2006 के बाद की ईवीएम मशीनों से चुनाव न कराए जाएं। यूपी चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि जुलाई में होने वाले नगर निकाय चुनाव के लिए नए ईवीएम उपलब्ध कराई जाएं। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो नगर निकाय के चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं। उत्‍तर प्रदेश में जून में निकाय चुनाव होने हैं और जल्‍द ही भारतीय निर्वाचन आयोग इस पर फैसला करेगा।

अरविंद केजरीवाल भी एमसीडी के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग कर रहे है लेकिन चुनाव आयोग ने साफ़ कर दिया था कि ईवीएम से कोई छेड़छाड़ हो ही नहीं सकती है। अरविंद केजरीवाल ने यूपी राज्‍य निर्वाचन आयोग के फैसले का स्‍वागत किया है। केजरीवाल ने साथ ही यह भी कहा कि दिल्‍ली राज्‍य निर्वाचन आयोग दिखाए कि उसके पास भी ऐसी ही रीढ की हड्डी है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बीएसपी की तरफ से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र और चुनाव आयोग से पूछा है कि क्या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें टैंपरप्रूफ हैं? बीएसपी ने अपनी याचिका में ईवीएम को टैंपरप्रूफ बनाने के लिए वोटिंग मशीनों में वोट वेरिफायर पेपर ऑडिट ट्रायल (VVPAT) लगाना अनिवार्य करने के लिए कोर्ट से निर्देश देने की मांग की है। जस्टिस जे. चेलमेश्वर की अगुवाई वाले बेंच ने केंद्र और आयोग से बीएसपी के आरोपों पर 8 मई तक जवाब देने को कहा है। बीएसपी ने आरोप लगाया है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ हो सकती है और पेपर ट्रायल अनिवार्य किया जाना चाहिए।

ईवीएम को लेकर बीएसपी की इस कानूनी लड़ाई को कांग्रेस, एनसीपी और टीएमसी जैसी दूसरी पार्टियों का भी समर्थन मिल रहा है। इन पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वे भी इस मुद्दे पर याचिका दाखिल करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में ही वोटिंग मशीनों में VVPAT को लगाने का निर्देश दिया था ताकि चुनाव प्रक्रिया में वोटरों का विश्वास मजबूत हो। कोर्ट ने हाल ही में सरकार से कहा था कि वह देशभर में VVPAT सिस्टम को लागू करने के लिए एक समयसीमा तय करे।

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