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CIA के एजेंट रहे एडवर्ड का दावा, आज भी जिंदा है ओसामा बिन लादेन

अमेरिकी खुफिया एजेंसी (सीआईए) के पूर्व कर्मचारी एडवर्ड स्नोडन ने दावा किया है कि ओसामा बिन लादेन आज भी जिंदा है।

बता दें कि स्नोडेन एनएसए के मास सर्विलांस प्रोग्राम की जानकारी मीडिया में सार्वजनिक करने के बाद अमेरिका से फरार हो गए थे जिसके लिए उन्हें दस साल की सजा सुनाई गई थी। फ़िलहाल एडवर्ड रूस में रह रहे हैं।

वर्ल्ड न्यूज़ डेली रिपोर्ट के मुताबिक, ओसामा अमेरिका के पैसों पर ऐश कर रहा है जबकि अमेरिका ने 2011 में दावा किया था कि उसने ओसामा को मार दिया है।

स्नोडन ने दावा किया कि, मेरे पास ऐसे सबूत हैं जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि ओसामा सीआईए के पेरोल पर है और वह परिवार के साथ बहामास में किसी जगह पर आलिशान जिंदगी बिता रहा है।

मास्को ट्रिब्यून की रिपोर्ट में स्नोडेन का दावा है कि ओसामा बिन लादेन अभी भी जिंदा हैं और सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) की ओर से खर्च के लिए हर महीने लाखों रुपए उसे दिए जाते हैं। उसे हर महीने करीब 100,000 से अधिक अमरीकी डालर दिए जाते हैं। ये पैसा उसके नसाउ के बैंक खाते में कुछ उद्योगपतियों और संस्थाओं के जरिए भेजे जाते हैं।

उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे पता नहीं है कि वह अब कहाँ है, लेकिन साल 2013 में वह पांच पत्नियों और कई बच्चों के साथ चुपचाप रह रहा था।

स्नोडेन का दावा है कि सीआईए ओसामा बिन लादेन को बहामास में एक गुप्त स्थान पर ले गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, लादेन लंबे समय तक सीआईए का सबसे कुशल गुर्गा था, अगर वो उसे ‘सील’ के हाथों मरने देते तो उनके अन्य गुर्गों को क्या संदेश जाता?

इसलिए उन्होंने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के साथ मिलकर उसकी मौत की झूठी खबर फैलाई और उसने आसानी से उनके कवर को छोड़ दिया। अब जब सभी लोग यह जानते हैं कि ओसामा की मौत हो गई है और उसे कोई खोजने की भी कोशिश नहीं करता।

ऐसे में उसके लिए गायब होना बहुत आसान है। वैसे भी अगर ओसामा की दाढ़ी हटा दी जाए और उसके मिलिट्री कोट को उतार दें तो उसे कोई पहचान नहीं पाएगा।

स्नोडन ने बताया कि ओसामा के बारे और ज्यादा खुलासा उनके आने वाली पुस्तक में होगा।

इस तथ्य के बावजूद स्नोडन कहते हैं कि वे इन दस्तावेजों को जारी करके अमेरिका के नागरिकों की मदद करने की कोशिश कर रहे थे, फिर भी उन्हें अमेरिका ने भगोड़ों में शामिल कर दिया।

बता दें कि स्नोडन को क्षमा करने के लिए एक याचिका पर 168,000 लोगों के हस्ताक्षर करने के बावजूद व्हाइट हाउस द्वारा 28 जुलाई 2015 को उसको खारिज कर दिया गया था। यह बाते स्नोडन ने हांगकांग में एक गुप्त स्थान पर कई पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान कही।

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