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गाँधी जी की जान बचाने वाले स्वतंत्रता सेनानी भीकूदाजी नहीं रहे, चाकू छीनकर गोडसे का हाथ मरोड़ दिया था

महात्मा गाँधी की जान बचाने वाले स्वतंत्रता सेनानी भीकूदाजी भिलारे का आज 98 साल की उम्र में निधन हो गया। महात्मा गाँधी की हत्या से पहले भी उनके ऊपर जानलेवा हमला हो चुका था।

कहा जाता है कि इसी तरह एक बार भीकूदाजी ने 1994 में पंचगनी में नाथूराम गोडसे से गांधी जी की जान बचाई थी।

दरअसल हुआ कुछ यूँ था कि एक बार पंचगनी में महात्मा गांधी की प्रार्थना सभा में सहयोगी ऊषा मेहता, प्यारेलाल, अरुणा असफ अली और अन्य  प्रार्थना में मौजूद थें।

इस बीच गोडसे हाथों में चाक़ू लिए दौड़ते हुए आया लेकिन भिलारे ने उसे रोका और हाथ मरोड़कर चाक़ू छीन लिया। हालाँकि बाद में गाँधी जी ने उसे जाने दिया था।

हालांकि कपूर कमिशन के अनुसार जुलाई 1944 की पंचगनी की जिस घटना का जिक्र भिलारे ने किया, वह कितनी सही है यहां तक कि ऐसी कोई घटना हुई भी थी कि नहीं, के बारे में कोई ठोस सबूत नहीं है।

बाद में भिलारे के सहयोगी मणिशंकर पुरोहित ने कमिशन को बताया कि यह घटना 1944 में नहीं जुलाई 1947 में हुई थी।

लेकिन इस घटना में भिलारे का कोई खास जिक्र भी नहीं था। कमिशन को बस इतना पता चला कि 1944 में उस दिन कुछ लोगों के कारण प्रार्थना सभा में  अशांति का माहौल बनाया गया था।

 

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