Tuesday , May 30 2017
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गुजरात: लोकल चुनाव में BJP की करारी हार, 10 साल बाद कांग्रेस की जोरदार वापसी

विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है । गुजरात के लोकल चुनाव में कांग्रेस ने जबर्दस्त जीत हासिल की है। इस चुनाव में बीजेपी के सारे प्रत्याशी चुनाव हार गए हैं। कांग्रेस ने 10 साल बाद वापसी करते हुए बीजेपी को शिकस्त दी है।

गुजरात के बोटाद जिले में स्थानीय एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) के चुनाव में बीजेपी के सभी 8 कैंडिडेट हार गये हैं । यहां पर बोटाद कांग्रेस अध्यक्ष डी एम पेटल के नेतृत्व वाले पैनल ने सारे सीटों पर जीत हासिल की है। 13 मई देर रात घोषित इन नतीजों से बीजेपी नेतृत्व हैरत में है। बीजेपी को इन नतीजों से इसलिए भी हैरानी है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक महीने पहले ही इस इलाके का दौरा कर चुके हैं, और सिंचाई से जुड़े एक स्कीम का उद्घाटन कर चुके हैं, लेकिन बीजेपी को पीएम के इस दौरे का भी कोई फायदा नहीं हुआ है।

इस हार के बाद बीजेपी में कलह खुलकर सामने आ गई है । APMC के एक निदेशक ने कथित रुप से हारे हुए चेयरमैन भिखा लनिया को थप्पड़ भी लगा दिया, इस निदेशक के मुताबिक चेयरमैन की नेतृत्व क्षमता की कमी की वजह से ही बीजेपी ये चुनाव हारी। हालांकि APMC का चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं लड़ा जाता है लेकिन पार्टी समर्थित नेता ही इस चुनाव को जीतते हैं।

जीत से खुश कांग्रेस का कहना है कि किसान बीजेपी से नाराज है, किसानों को कपास और मूंगफली के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं इसलिए किसानों ने बीजेपी को सबक सिखाते हुए कांग्रेस को चुना है । वहीं पाटीदार अनमात आंदोलन समिति (PAAS) ने भी बीजेपी की हार का जश्न मनाया है। PAAS के बोटाद संयोजक दिलीप सबवा का कहना है कि ये नतीजा बीजेपी के प्रति किसानों के गुस्से को दर्शाता है, इसका ये भी मतलब है कि पीएम मोदी की घोषणाओं का भी किसानों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

बीजेपी किसान मोर्चा के अध्यक्ष बाबू जबेलिया बोटाद के ही रहने वाले हैं, उनका कहना है कि वे पार्टी की हार को स्वीकार करते हैं और इस बात का पता लगाएंगे कि आखिर बीजेपी से कहां चूक हुई है। भले ही बीजेपी की ये हार लोकल चुनाव में हुई हो लेकिन इसको लेकर बीजेपी नेताओं के चेहरे पर शिकन आ गई है, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि वो किसानों से कहीं दूर तो नहीं हो रहे हैं जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों में ना पड़े ।

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