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गुजरात में दलितों पर अत्याचार के मामले में टूटा 16 साल का रिकॉर्ड

गुजरात में दलितों के लिए साल 2016 बहुत ही दर्दनाक रहा है। साल 2016 गुजरात में दलितों पर जुर्म, रेप और हत्या की वारदातों में पिछले 16 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बीते साल जुलाई में हुआ गुजरात का ऊना कांड तो आप सबको याद ही होगा जब गोहत्या के आरोप में गौरक्षकों ने दलितों के कपडे उतार कर उनके साथ बेदर्दी से मारपीट की थी।

हालांकि दलितों ने बताया कि वह मरी हुई गायों की चमड़ी निकाल रहे थे न की उन्होंने गाय की हत्या की थी। इस घटना के बाद ही गुजरात में दलितों के साथ बदसलूकी और मारपीट की कई और घटनाएं भी सामने आई। जिस पर गुजरात सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया था और इसके चलते ही तत्कालीन आनंदीबेन पटेल सरकार की कड़ी निंदा की गई थी।

एक आरटीआई के तहत मिली जानकारी से सामने आया है कि गुजरात में बीते साल दलितों के ख़िलाफ़ कुल 1,355 मामले दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े दलितों के साथ मारपीट, हत्या और दलित महिलाओं के साथ रेप के मामलों के हैं।

आरटीआई एक्टिविस्ट कौशिक मंजुलबेन बाबूभाई ने गुजरात डीजीपी से हासिल आंकड़ों के आधार पर बताया कि 2016 में दलितों के साथ रोज़ाना अत्याचार की लगभग 4 घटनाएं दर्ज की गई। ये आंकड़े गुजरात के 33 ज़िलों के 40 पुलिस दफ़्तर से निकाले गए हैं।

गौरतलब है कि दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामलों के आंकड़ों के सामने आने के बाद बीजेपी सरकार फिर से विपक्ष के निशाने पर आ सकती है।

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