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सिंधु घाटी का नाम बदलकर सरस्वती नदी सभ्यता रखने की तैयारी में हरियाणा सरकार

भाजपा सरकार ने सिंधु घाटी सभ्यता का नाम बदलकर सरस्वती नदी सभ्यता करने का प्रस्ताव पेश किया है। हरियाणा सरकार की संस्था हरियाणा सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड (एचएसएचडीबी) का कहना है कि चूंकि अब सरस्वती नदी का अस्तित्व दुनिया को पता चल गया है, इसलिए सिंधु घाटी सभ्यता का नाम बदलकर सरस्वती नदी सभ्यता रखा जाना चाहिए।

बोर्ड ने इससे जुड़ी एक सिफारिश सरकार को भेजने वाली है। इस बोर्ड के चेयरमैन खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हैं। इससे पहले हरियाणा सरकार ने गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम रख दिया था।

एचएसएचडीबी बोर्ड का कहना है कि जब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एक्सपर्ट जब यह मान चुके हैं कि सरस्वती नदी एक कल्पित कथा नहीं है, और इसका वजूद वास्तविकता है, तो हमारे देश में इसका नाम सिंधु घाटी सभ्यता से बदलकर सरस्वती नदी सभ्यता रखा जाना चाहिए।

एचएसएचडीबी के उपाध्यक्ष प्रशांत भारद्वाज ने कहा, “अब किसी को भी सरस्वती नदी को कपोल कथा नहीं कहनी चाहिए। क्योंकि इसका वजूद अब प्रमाणित हो चुका है।” उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी को अब धार्मिक कथा के तौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि ऐसा कहकर अब हम अपनी सभ्यता और विरासत को कम आंकते हैं।

गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने इस साल कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में सरस्वती महोत्सव का आयोजन किया था। इस आयोजन में सरस्वती नदी की एतिहासिक पृष्ठभूमि पर चर्चा के लिए देश और विदेशों से पुरातत्वविद इतिहासकारों को बुलया गया था।

बता दें कि आज से सात महीने पहले हरियाणा सरकार ने दावा किया था कि पुरातात्विक खुदाई में सरस्वती नदी के अस्तित्व का पता चल चुका है। और सरकार ने खुदाई के जगह पर पानी छोड़कर नदी की धारा को पहचाने का काम शुरू कर दिया है।

 

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