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रिपोर्ट: गौ तस्करी के 20 फीसदी आरोपी हिन्दू हैं

धर्मसत्ता के ग्लोबल उभार के दौर में भारत भी इससे अछूता नहीं है। बल्कि यूँ कहें कि हमारे यहाँ इसके बढ़ने की गति औरों से कहीं तेज़ है जिसकी जद में अल्पसंख्यकों का आना ज़ाहिर सी बात है।

इसी धर्मसत्ता की अहम कड़ी है गाय जिसके नाम पर गौरक्षों के गुंडे आए दिन मुसलमानों पर इसकी तस्करी का आरोप लगाकर मारपीट करते रहते हैं। बड़ी बात यह कि बीते एक-दो सालों में मारपीट अब हत्या में बदल चुकी है।

आम तौर पर देखा जाता है कि ऐसे मामलों में अफवाहों को बेमतलब की हवा दी जाती है जिसके बहाव में उन्मादी भीड़ के आँख और कान बंद हो जाते हैं। उनके भीतर हकीक़त को समझने की कुव्वत ख़त्म सी हो जाती है।

दादरी के अखलाक से लेकर अलवर के पहलू खान के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। न तो वे गौ तस्कर थे और न ही उन्मादी भीड़ और बदमाशों ने उनकी बाते सुनी।

बहरहाल, ऐसे में अब सवाल उठता है कि जिस गाय को लेकर मुसलामानों को शक की निगाह से देखा जा रहा है। उसकी तस्करी के पीछे क्या सिर्फ मुसलमान ही हैं?

तथ्यों की रोशनी में अगर इन सवालों पर गौर किया जाए तो जवाब चौकाने वाले मिलेंगे।

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक़ करीब 20 फीसदी हिन्दू समाज के लोग गौतस्कर के आरोप में पकड़े गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में 27 यादव, 9 गुर्जर, 7 जाट, 4 राजपूत, 2 पंजाबी, 1 ब्राह्मण और बाकी अन्य हिन्दू जातियों के गौतस्कर पकड़े गए हैं।

अलवर जिले में 2015 से अबतक पुलिस ने करीब दो साल में गौतस्करी के 309 मामले पकड़े हैं। जिनमें टोटल 516 गौतस्कर पकड़े गए हैं। उनमें से 424 मुस्लिम गौतस्कर थे, जबकि 92 हिन्दू गौतस्कर राजस्थान गौवंश अधिनियम में गिरफ्तार किए गए हैं। इन आकड़ों से यह साबित होता है कि गौतस्करी में पैसे कमाने के लिए मुस्लिमों के साथ हिन्दू समाज के लोग भी शामिल हैं।

अलवर जिले में 2016 में मालाखेड़ा ओर थानागाजी पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत बंजरा और बावरिया समाज के  6-7 लोग गौतस्करी के आरोप में गिरफ्तार हुए थे। ये लोग गाय गांवों से खरीद खरीदकर अपने घरों में एकत्रित करते थे और बाद में मेव समाज के तस्करों से सांठगांठ कर हरियाणा बॉर्डर पार करवा कर गोतस्करी को अंजाम देते थे और इसकी एवज में मोटा कमीशन लेते थे।

इसके अलावा 2015 में भरतपुर जिले के नदबई थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक ऐसा मामला सामने आया था जहां गौतस्कर भी हिन्दू थे और उनको पकड़ कर पीटने और फायरिंग करने वाले भी हिन्दू समाज के लोग थे। मामले में जब पुलिस पकड़ने गई तो इन्होंने पुलिस पर भी हमला किया और फायरिंग की थी। इस मामले में गिरफ्तार चार आरोपी गौशालाओं में रहने वाले साधु संत और गौसेवक थे। जिनसे पुलिस ने अवैध हथियार भी बरामद किए थे।

इसी तरह 2016 जनवरी माह में डीग थाना क्षेत्र के अंतर्गत जाट समाज के लोग गाय खरीदकर गांव जा रहे थे तभी गौरक्षको ने हमला कर दिया था।

पुलिस अधीक्षक राहुल प्रकाश ने बताया ने बताया कि पुलिस के आकड़ों के आधार पर यह कह सकते हैं कि गौतस्करी से जुड़े मामले में समाज, जाति और सम्प्रदाय से कोई लेना देना नहीं है। लोग पैसे कमाने के लिए गौतस्करी के धंधे में लिप्त होते हैं।

2015 के बाद के आंकड़ों के आधार पर कह सकते हैं की करीब 20 फीसदी हिन्दू समाज के लोग भी गोतस्करी में पकड़े गए हैं। गौतस्करों को पड़कने में पुलिस का हिन्दू और मुस्लिम दोनों समाज के लोग सहयोग करते हैं।

 

 

 

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