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यहाँ सेहरी के लिए मुसलमानों को जगाते हैं हिन्दू, भाईचारे की इस मिसाल की शुरुआत 1975 में हुई थी

आजमगढ़ और उसके आसपास का इलाक हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के लिए मशहूर है, लेकिन पिछले कई दशकों से इस उदाहरण को बदनाम करने की बेजा कोशिश की जा रही है।

इसके बावजूद भी मुबारकपुर के गुलाब यादव ने उस प्यार और मुहब्बत को एक बार फिर याद दिलाया है और हिन्दू-मुस्लिम का एक नई मिसाल पेश की है।

खबर कुछ यूँ है कि मुबारकपुर में सेहरी के लिए लोगों को उठाने का काम गुलाब यादव और उनके बेटे अभिषेक करते हैं। यही नहीं, जब तक पूरा गांव जाग नहीं जाता, दोनो बाप बेटे इस काम में लगे रहते हैं, जिसमें लगभग दो घंटे से अधिक समय लग जाता है।

सेहरी के समय जब नींद अपने शबाब पर होती है ऐसे में अपने नींद की क़ुरबानी देकर दूसरे वर्ग के लोगों की सेवा की भावना से यह काम एक आदर्श है।

उल्लेखनीय है कि गुलाब यादव यह काम केवल आज या इस साल नहीं कर रहे हैं, बल्कि इस काम की शुरुआत उनके पिता ने 1975 में की थी, जिसकी विरासत को वे आज भी बखूबी निभा रहे हैं।

जबकि गुलाब एक मजदूर पेशा व्यक्ति हैं और साल के बाकी दिनों दिल्ली में मजदूरी करते हैं, लेकिन रमजान आते ही वह घर इस ड्यूटी के लिए लौट आते हैं।

 

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