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हिंदू राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ता हिंदुस्तान

वोट बैंक के लिए भाजपा हमेशा से मुसलमानों पर हमला करती रही है और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाना भी उसी नीति का हिस्सा है।

हालाँकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा यूपी के नए मुख्यमंत्री के रूप में योगी को चुनना एक गलत कदम था। लेकिन इस एक बात तो साफ़ है कि भाजपा अपना बरकरार रखना चाहती है। एक दिग्विजयनाथ थे जो 1934 में गोरखनाथ मंदिर के महंत बन गए थे।

वह हिंदू महासभा और आरएसएस के करीबी थे और 22 दिसंबर 1949 की रात बाबरी मस्जिद में राम की मूर्ति रखने में शामिल थे। 1967 में अवैद्यानाथ महंत बने और यूपी विधानसभा में पांच बार और लोकसभा के लिए चार बार चुने गए थे।

अवैद्यानाथ बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में भी आरोपी थे। आदित्यनाथ भी गोरखपुर से पांच बार लोकसभा के लिए चुने गए।

भाजपा हिंदूओं के बीच से कट्टर धार्मिक व्यक्तियों का इस्तेमाल करती है जो चुनाव में उनकी सफलता की गारंटी है।

आदित्यनाथ ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत गायों के संरक्षण के लिए एक संगठन के साथ की। गौरतलब है कि 2002 में एक युवा संगठन हिंदू युवा वाहिनी (एचआईवी) बनाया था। वरिष्ठ राजनीतिज्ञ धीरेंद्र झा की ई-बुक में योगी आदित्यनाथ और हिंदू युवा वाहिनी की राजनीतिक यात्रा का एक रिकॉर्ड दर्ज है।

वह लिखते हैं कि एचआईवी के गठन के पहले वर्ष के दौरान क्षेत्र में कम से कम छह दंगे हुए और 2007 तक गोरखपुर और पड़ोसी जिलों में कम से कम 22 दंगे हुए थे। झा ने नोट किया कि उनका राजनीतिक भाग्य भाजपा या आरएसएस पर निर्भर नहीं है बल्कि यह एक अतिवादी प्रकार के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से प्रेरित है।

पचास साल पहले तत्कालीन आरएसएस प्रमुख एमएस गोलवलकर ने मुसलमानों और कम्युनिस्टों के साथ ईसाइयों को ‘आंतरिक खतरों’ के रूप में बांट दिया।

जून 2016 में आदित्यनाथ ने कहा कि मदर टेरेसा हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की साजिश का हिस्सा थीं। हिंदुओं को सेवा करने के नाम पर टारगेट किया गया और फिर उनका धर्म परिवर्तित किया गया।

उन्होंने कुख्यात एंटी-रोमियो दस्तों का भी विस्तार किया। आदित्यनाथ को दो आपराधिक मामलों में दोषी ठहराया गया है। दो अन्य मामलों में भी आरोप लगे हैं। कुछ अन्य मामलों में संज्ञान लिया गया है जिसमें हत्या का प्रयास शामिल हैं। ऐसे में ज़ाहिर है कि उनके पास कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक संपादकीय में टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह कदम धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए चौंकाने वाला है और यह संकेत है कि साल 2019 में आम चुनावों से पहले भाजपा आगे बढ़ रही है।

आरएसएस प्रचारक प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में आदित्यनाथ का आना मानो भारत अब एक हिंदू राष्ट्र बनने के पथ पर अग्रसर है।

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