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योगी की हिन्दू युवा वाहिनी शिवसेना के साथ चुनावी मैदान में, भाजपा को हो सकता है नुकसान

गोरखपुर। भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ के प्रति समर्पित हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा है कि भाजपा ने योगी आदिनाथ को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित नहीं करके उनका अपमान किया है।

एनडीटीवी में प्रकाशित खबर के अनुसार भाजपा ने योगी आदित्यनाथ को उस समिति से बाहर कर दिया जो प्रत्याशियों को अंतिम रूप देती थी। गोरखपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ की हिंदू युवा वाहिनी भारतीय जनता पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी कर सकतें हैं।

साल 2002 में योगी आदित्यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया था और भाजपा नेता ही इसके मुख्य संरक्षक हुआ करते हैं। गोरक्षा, लव जेहाद के साथ-साथ दंगों के दौरान भी इसकी भूमिका संदिग्ध रही है। पूर्वांचल के कुछ जिलों में इसकी अच्छी मौजूदगी है। गोरखपुर के अलावा मऊ, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, संत कबीर नगर एवं सिद्धार्थ नगर में इस संगठन की अच्छी पहचान है।

वाहिनी के कुछ नेता जैसे राज्य प्रभारी राघवेंद्र सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन इसका एक विद्रोही घटक राजनीति में आने को बेताब है और इस बार उन्होंने अपने कुछ प्रत्याशी खड़े भी किए हैं और कुछ अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों को अपना समर्थन भी दे रहे हैं।

वाहिनी के महामंत्री राम लक्ष्मण कहते हैं कि वे लोग पिछले 15 सालों से वाहिनी के लिए काम कर रहे हैं और अगर उनकी नहीं सुनी जाएगी तो वे कैसे साथ में काम कर पाएंगे।

लक्ष्मण के पास एक लैटर हैड है, जिसके ऊपर राज्य प्रमुख के तौर पर सुनील सिंह का नाम है तथा 20 के करीब हिंदू युवा वाहिनी-शिव सेना के सांझा उम्मीदवारों के नाम लिखे गए हैं।

हालांकि, वाहिनी के मौजूदा राज्य प्रमुख राघवेंद्र का कहना है कि हिंदू युवा वाहिनी का कोई चुनाव नहीं लड़ रहा है और जो लोग चुनाव लड़ रहे हैं, उन्हें संगठन से निकाल दिया गया है।

वहीँ सुनील संगठन से उनके निकाले जाने को असंवैधानिक बताते हैं। भाजपा के क्षेत्रीय प्रवक्ता सत्येन्द्र सिन्हा कहते हैं कि हिंदू युवा वाहिनी की पहचान आदित्यनाथ के साथ है और आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं कि वाहिनी चुनाव नहीं लड़ रही है, तो इसका मतलब है कि जो चुनाव लड़ रहे हैं उसका वाहिनी से कोई संबंध नहीं है।

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