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रमज़ान की रातों में नहीं सोता हैदराबाद

हैदराबाद  शहर रमजान की रातों में नहीं सोता। यहां लोग आधी रात बीत जाने के बावजूद भी सड़कों पर चहल-पहल करते दिखाई देंगे। रमजान के आखिरी दस दिनों में तो यहां का नज़ारा एकदम अलग ही होता है। शहर की सड़क के दोनों ओर खड़ी कारों में सवार लोग लजीज हलीम का लुत्फ उठाते भी नजर आ जायेंगे।

व्यस्त टोली चौकी-मेहदीपनम चौक पर स्थित हलीम के दो नामी ठिकानों ‘पिस्ता हाउस’ और ‘शाहजी हाउस’ के दर्जनों वेटर हलीम खाने वालों की खिदमत में जुटे रहते हैं। खरीददार, मस्जिद से लौट रहे नमाजी, आईटी संस्थानों से आ रहे तकनीशियन और असंख्य परिवार इन जायके के ठिकानों पर गरम हलीम का स्वाद लेते हैं।

यह हैदराबाद का पुराना शहर नहीं है, इसलिए ऐतिहासिक चारमीनार के आसपास के चर्चित बाजारों की स्थिति की कल्पना अच्छी तरह की जा सकती है। करीब आधा रमजान गुजर गया है। समृद्ध मुस्लिम विरासत वाले इस ऐतिहासिक शहर में रमजान की खरीदारी शुरू हो गई है।

नमाजी रात करीब 8.30 बजे नमाज-ए-तरावीह के लिए मस्जिदों में जुटते हैं और करीब 3.30 बजे विशेष नमाज तहज्जुद के साथ रात को अलविदा कहते हैं।

अधिकांश परिवारों के लिए ईद खरीदारी का मौका भी है। वे नए कपड़े, जूते-चप्पल, चूड़ियां, मेहंदी, इत्र, बर्तन, घरेलू सामान, सेंवई और सूखे मेवे खरीदते हैं। दिन में रोजा रखने के चलते थक जाने की वजह से अधिकांश खरीदारी रात आठ बजे के बाद ही करते हैं जो सहर तक जारी रहती है।

हैदराबाद ईद की खरीदारी करने वालों की सबसे पसंदीदा जगह है। यहां तेलंगाना के साथ ही पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से भी लोग खरीदारी करने आते हैं। पूरे महीने के दौरान सभी प्रकार के फलों की बाजार में बाढ़ सी आ जाती है क्योंकि मुसलमान ‘इफ्तार’ के लिए फल पसंद करते हैं।

हजारों विक्रेताओं ने पुराने शहर में चारमीनार के आस-पास के क्षेत्रों में फुटपाथ पर व्यवसाय स्थापित किया है। हाल के वर्षों में नामपल्ली, मल्लपल्ली, मसाब टैंक, आसिफ नगर, मेहदीपटनम, टोली चौकी, गोलकोंडा और पुराने शहर के बाहर के अन्य मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में रमजान के दौरान वाणिज्यिक गतिविधि तेज हो जाती हैं।

परिवारों को ‘जकात’ (उनके नकद और अन्य मूल्यवान वस्तुओं पर 2.5 प्रतिशत का इस्लामी संपत्ति कर) देने वाले परिवारों के साथ और लगभग हर परिवार ने ‘फितरा’ (इस वर्ष 100 रुपये प्रति सदस्य तय किया), गरीब भी इसमें शामिल हो जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक वस्त्र और फुटवियर को कवर करने वाला व्यवसाय करीब 2,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

विदेशों में रहने वाले कई हैदराबादी ईद पर अपने घर आते हैं। कई एनआरआई रात की नमाजों के लिए मस्जिदों में प्रसिद्ध धार्मिक विद्वानों के उपदेश सुनने के लिए जाते हैं। वे कहते हैं कि यह धार्मिक गतिविधियों और अद्वितीय हैदराबाद की संस्कृति का मिश्रण है जो रमजान को इसको खास बनाते हैं।

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