Tuesday , September 26 2017
Home / India / देश के जाने-माने साहित्कारों ने कहा- ‘भारत को महान बनने से पहले सुरक्षित देश बनना पड़ेगा’

देश के जाने-माने साहित्कारों ने कहा- ‘भारत को महान बनने से पहले सुरक्षित देश बनना पड़ेगा’

देश के प्रसिद्ध साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने राष्ट्रवाद की निंदा करते हुए मोदी सरकार पर देश में नफरत फैलाने का आरोप लगाया। देहरादून में आयोजित एक साहित्यिक महोत्सव के अंतिम दिन प्रतिष्ठित लेखक नैन तारा सहगल, नंदिता हक्सर, हर्ष मंदर और किरण नागरकर ने सार्वजनिक रूप से राष्ट्रवाद को आड़े हाथों लिया।

ख़बर के मुताबिक ‘डब्ल्यू आई सी इण्डिया देहरादून कम्युनिटी लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन लेखक किरण नागरकर से डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाले अमेरिका और मोदी के नेतृत्व वाले भारत में समानता पर अपने विचार ज़ाहिर किए।

नागरकर ने अमेरिका में कुछ मुस्लिम देशों के नागरिकों पर प्रतिबंध का हवाला देते हुए कहा कि किसी के समुदाय को अलग थलग करना सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत में हिंदू भी आतंकवाद फैलाने में उतने ही सक्षम हैं, जितना की दूसरे। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रवाद पर तनिक भी ध्यान नहीं देते, इसके बावजूद खुद के भारतीय होने पर गर्व करते हैं।

नागरकर ने कहा कि मुझे भारतीय होने पर गर्व है, लेकिन राष्ट्रवाद पर लानत भेजता हूँ। मैं नहीं चाहता कि भारत एक महान देश बने, इसकी बजाय मैं चाहता हूँ कि भारत एक अच्छा देश बने, जहां सभी को प्यार और सम्मान मिले और जहां सभी लोगों के अधिकार सुरक्षित हों।

देश की वर्तमान सरकार को देशवासियों के बीच नफरत फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सवालों से नफरत करती है।

कांग्रेस के करीबी रहे हर्ष मंदर ने कहा कि मौजूदा समय में राष्ट्रवाद को लेकर काफी शोर-शराबा है। हर्ष मंदर ने कहा कि यह देश किसका है? और किन शर्तों पर? देशभक्ति के लिए क्या करना है?

दर्शकों की ओर से यह सवाल पूछने के बाद हर्ष मंदर ने कहा कि उनके लिए भारत का मतलब एक ऐसा देश है, जो सभी के लिए है और किसी को अपनी देशभक्ति साबित नहीं करनी होती।

उसके बाद प्रतिष्ठित लेखक नैन तारा सहगल ने भी राष्ट्रवाद पर तीखा हमला किया। सहगल ने कहा कि राष्ट्रवाद मूर्खता की निशानी है, जो देश 70 सालों से एक स्वतंत्र देश है। इसमें अचानक राष्ट्रवाद का नारा लगाने की जरूरत नहीं है।

आज सत्ता में बैठे हुए वे लोग जो राष्ट्रवाद का नारा लगा रहे हैं, वह देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कहीं नहीं थे।

 

TOPPOPULARRECENT