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जेल में गुजरे मुस्लिम युवाओं की झूठे आरोप में ज़िन्दगी के 12 साल

मोहम्मद अब्दुल ज़ाहिद जिसे एक दिन पहले अदालत से बरी किया गया। बेगमपेट टास्क फोर्स कार्यालय विस्फोट मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था।

12 साल के लिए जेल में सड़ते हुए ज़ाहिद ने बताया कि अत्याचारों और उनसे मिलने वाली ज़ुल्मों को मापने के लिए कोई भी पैमाना नहीं है।

मोहम्मद अब्दुल जहाद को अदालत ने एक दिन पहले बरी कर दिया था। इससे पहले कहा था कि हम आरोपी थे लेकिन दोषीों नहीं थें। लेकिन मीडिया और पुलिस ने उन्हें आतंकवादी घोषित किया और उनको भी उस नाम से जेल में बुलाया जाता था। ये कहां का न्याय है ?

उन्होंने कहा कि निर्दोष होने के बावजूद हमें 12 साल तक जेल में रहना पड़ा। मानसिक आघात का सामना करना पड़ता था हमें समाज में आतंकवादियों के रूप में देखा गया। अदालत जेल अधिकारियों के निर्णय से पहले हमें अपराधियों की घोषणा की और आईएसआई एजेंटों के रूप में हमें नाम दिया।

जहाद ने बताया कि 2006 में मूसा राम बाग मस्जिद के सामने एक छोटी सी घटना के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था। यहाँ तक की पहले मुझे पूर्व मालाकपेट के पूर्व विधायक इंद्रसेन रेड्डी (भाजपा) पर हमला करने के आरोपों पर गिरफ्तार किया गया था। हालांकि पुलिस आरोपों का सबूत नहीं था।

आगे ज़ाहिद ने बताया कि बाद में बेगमपेट टास्क फोर्स कार्यालय का विस्फोट हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मुझे फोन किया और मुझे उस मामले में गिरफ्तार किया गया। इस तथ्य के बावजूद मुझे 12 साल के लिए जेल में रखा गया था और १२ साल से बाद बरी कर दिया गया क्यूंकि मैं निर्दोष हूँ।

अपने तकलीफों को बयान करते हुए वो बताते हैं, मुझे और मेरे दोस्तों को गिरफ्तार करने के बाद बुरी तरह पीटा था और तीसरा डिग्री इस्तेमाल किया गया था। यहाँ तक की हमारी जेल बैरक का नाम आईएसआई एजेंट बैरक था। जब हमें अस्पताल ले जाया गया, डॉक्टरों को बताया गया कि हम आईएसआई एजेंट हैं, जिसके बाद हमारे प्रति डॉक्टरों का रुख पूरी तरह बदल जाएगा। पुलिस बहुत अच्छी तरह से जानते थे कि मक्का मस्जिद या बेगमपेट विस्फोट मुस्लिम युवा निर्दोष हैं, फिर भी हम पर अत्याचार किया गया था।

आज समाज में ज़ाहिद जैसे कितने ही मुस्लिम नवजवानो को अपनी ज़िन्दगी की कीमत चुकानी पड़ी है। कितने ही मिसाल हैं जिनके निर्दोष होने पर भी पुलिस और मीडिया द्वारा आतंवादी घोषित कर दिया जाता है।

ज़ाहिद कहतें हैं कि ‘साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित, असीमानंद जैसे अपराधियों को जमानत मिल सकती है। लेकिन पुलिस हमारी जमानत को रोकती है। सरकार ने मक्का मस्जिद विस्फोट में फंसाया निर्दोष युवाओं को मुआवजा और चरित्र प्रमाण पत्र तो दे दिया है लेकिन वे अपने ज़िन्दगी के 12 महत्वपूर्ण वर्षों को वापस कर सकते हैं..???

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