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टेलीफोन एक्सचेंज चलाकर ISI नेटवर्क ने सरकार को लगाया करोड़ों का चूना

पैरेलल टेलीफोन एक्सचेंज चलाकर आर्मी से जुड़ी जानकारी लीक करने से सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा है। सम्बंधित लोगों से पूछताछ के दौरान जांच में पता चला था कि देशभर में 500 से ज्यादा कम्युनिकेटर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम कर रहे थे। सीमा पार से हैंडलर इनकी निगरानी कर रहे थे।

 

ये हैंडलर ही हवाला के जरिए नेटवर्क से जुड़े तमाम लोगों को पैसा भेज रहे थे। भोपाल से गिरफ्तार मनीष गांधी, धुव्र सक्सेना और मोहित अग्रवाल पैरेलल टेलीफोन एक्सचेंज से करीब सवा आठ लाख रुपए महीना कमाते थे। इस दौरान एक सिमकार्ड से रोजाना करीब 400 मिनट तक इस्तेमाल हुई।

 

 

मध्य प्रदेश पुलिस ने केंद्र सरकार को एक जांच रिपोर्ट भेजी है जिसमें यह खुलासा किया गया है इससे केंद्र सरकार को दो हजार करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है। यूपी के बाद जब मध्य प्रदेश में एटीएस ने इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया तो कई जांच एजेंसियों के होश उड़ गए। जांच एजेंसियों के हाथ इस खेल के सरगना मनोज मंडल तक जा पहुंचे, जिसे पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार किया।

 

 

एटीएस को आईएसआई एजेंट मनोज मंडल के सौ ज्यादा बैंक खातों के बारे में पता चला है। मनोज ही ये पैसा दूसरे एजेंट को भेजता था। दो महीने पहले सतविंदर व दादू से जम्मू पुलिस ने पूछताछ की थी, तभी आईबी ने एमपी पुलिस को बलराम के बारे जानकारी दे दी थी। बलराम बार-बार पाकिस्तान की बात कर रहा था। खुफिया एजेंसियों ने उसकी कॉल की भी लगातार निगरानी की थी। जब यह साबित हो गया कि बलराम ने 100 से ज्यादा फर्जी अकाउंट खुलवा रखे हैं और बदल-बदलकर नंबरों से पाकिस्तान बात कर रहा है तो उसकी घेराबंदी की गई।

 

 

इन्होंने कबूल किया था कि मध्य प्रदेश से इन्हें सेना से जुड़ी तमाम जानकारियां और मदद मिला करती थीं। इसके लिए इन्हें मोटी रकम दी जाती थी, जो सतना में रहने वाले बलराम के खाते में पाकिस्तानी हैंडलर्स ट्रांसफर करते थे। सतविंदर पाकिस्तानी हैंडलर्स के कहने पर सैन्य सूचनाएं जुटाता था। पुल और सेना के कैम्प की फोटो खुफिया तरीके से लेता था। इसके अलावा, केंद्रीय सुरक्षा बलों के मूवमेंट और वाहनों की जानकारी भी जुटाई जा रही थी।

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