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PM मोदी से मिला जमीयत उलेमा-ए-हिंद का प्रतिनिधिमंडल

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के मुस्लिम नेताओं से कहा कि वे तीन तलाक मुद्दे को राजनीतिकरण से बचाकर उसमें सुधार की शुरुआत करें। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नेताओं से मुलाकात में मोदी ने कहा कि वो इस मुद्दे पर सुधार की शुरुआत करें।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नेता मौलाना महमूद मदनी ने मोदी से मुलाकात के बाद कहा कि पीएम का सभी मुद्दों पर रुख तसल्ली देने वाला रहा। मुस्लिम समुदाय के 25 नेताओं ने मोदी से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। पीएम ने उनसे कहा कि डेमोक्रेसी की सबसे बड़ी ताकत आपसी प्यार और सद्भभावना है।

किसी भी सरकार को नागरिकों से भेदभाव करने का कोई हक नहीं है। पीएम ने कहा कि भारत की खूबसूरती ही ‘अनेकता में एकता’ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ी को दुनिया में बढ़ती कट्टरता से बचाना जरूरी है।
जमात द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसा यह बैठक लगभग दो घंटे तक चली। बाद में, मीडिया से बात करते हुए जमीयत के अपने समूह के महासचिव महमूद मदनी ने इस बैठक को संतोषजनक और सकारात्मक बताया।

उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री ने हमारी बात को पूरी तरह से सुना और हमारी चिंताओं से सहमत हुए। मदनी ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ हमारी मुलाकात में मुख्य रूप से पारस्परिक बातचीत के द्वार खोलने के लिए और करीब से समझने की वजह से आगे के अवसर पैदा होंगे और हम सभी हमारे देश के विकास में हमारी भूमिका निभाने में सक्षम होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भारतीय मुस्लिम समुदाय के नेताओं की यह पहली ऐसी उच्च स्तरीय बैठक थी। कुछ दिन पहले महमूद मदनी ने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा है।

 

मोदी के सत्ता में आने के तुरंत बाद कम से कम तीन उच्चस्तरीय बैठकें मुस्लिम समुदाय के नेताओं द्वारा आयोजित की गईं। नेताओं ने फैसला किया था कि प्रधानमंत्री से मिलने की आवश्यकता पैदा होनी चाहिए और यह एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल होना चाहिए जो उससे मिलने जाये।

प्रतिनिधिमंडल में मुस्लिम मजलिस-ए मुशावरात, जमात-ए इस्लामी हिंद और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड या दारुल उलूम देवबंद जैसी संस्थाओं के प्रमुख नेता शामिल नहीं थे।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कश्मीर के हालात पर चिंता जताई। नेताओं ने कहा कि सिर्फ आप ही इस मुद्दे को सुलझा सकते हैं। मुस्लिमों को देश के विकास में बराबर का भागीदार बताते हुए मोदी ने कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए उन्हें पूरी ताकत से सामने आना चाहिए।

मुस्लिम नेताओं ने कहा कि वो देश के खिलाफ होने वाली किसी भी साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे। उनके एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स सरकार की स्टार्ट अप स्कीम्स का फायदा उठाएंगे। मुस्लिम नेताओं ने मोदी सरकार की वेलफेयर स्कीम्स की भी तारीफ की।

मीटिंग के दौरान नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि दुनिया इस वक्त भारत की तरफ देख रही है और हमारी ये जिम्मेदारी है कि हम देश को आगे ले जाने की तरफ मिलकर कदम बढ़ाएं।

मोदी से मुलाकात करने वालों में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना कारी सैयद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी, जनरल सेक्रेटरी मौलाना महमूद मदनी, मुंबई बेस्ड अंजुमन-ए-इस्लामी के प्रेसिडेंट जहीर काजी, एजुकेशन एक्सपर्ट अख्तरउल वासे और मौलाना बदरुद्दीन अजमल शामिल थे।

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