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झारखण्ड: भाजपा सरकार की कानून व्यवस्था, उन्मादी भीड़ नईम को पीटती रही और पुलिस तमाशा देखती रही

राँची। चार लोगों को बच्चा चोर के शक में पीटने वाली घटना के बाद भाजपा सरकार न केवल देश में शांति और धर्मनिरपेक्षता बनाए रखने में नाकाम रही बल्कि कानून-व्यवस्था भी चौपट हो गई है। अच्छे दिन के वादे के बीच ऐसी घटनाएं हो रही हैं और भीड़ द्वारा बेकसूरों को मार दिया जाता है।

खैर, ‘बच्चा चोर’ जैसी अफवाह को एक तरफ रख दीजिये। अहम सवाल यह है कि एक उप पुलिस अधीक्षक, सर्कल निरीक्षक, सहायक उप-निरीक्षक (2) और 30 पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की, तो क्या यह नरसंहार फिक्स था? क्या हम इसे कानून व्यवस्था की मृत्यु का लेबल दे सकते हैं? इन अधिकारियों की आँखों के सामने सब हुआ था।

राजनगर स्टेशन के पुलिसकर्मियों को इस दिन सुबह 6 बजे शोभपुर में कुछ ग्रामीणों से फोन किया। 6.30 बजे तक टी पी कुशवाहा, प्रभारी अधिकारी, दो एएसआई और पांच कांस्टेबल शोभापुर पहुंचे। करीब 7.30 बजे आधे घंटे के अंदर डीआईएसपी, सीआई राजीव निराज और 20 पुलिसकर्मियों सहित 14 किलोमीटर दूर सेराइला जिला मुख्यालय से मौके पर पहुंचे।

हालांकि, पीड़ितों के परिवार के सदस्यों शेख सजु (25), शेख सिराज (26) और शेख हलीम (28) मौके से भागने में कामयाब रहे। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को लोगों को मारते देखा था। तीन घंटे से अधिक समय तक रक्त में नईम लथपथ था और वह दया के लिए विनती कर रहा था लेकिन पुलिस मूक बनी रही।

करीब 11 बजे पुलिस गंभीर रूप से घायल और बेहोश नईम को सरायकला अस्पताल ले गई जहां कुछ मिनटों में वह मर गया। लगभग 1 बजे पुलिस ने पद्ममसाई में मुख्य सड़क से सजु और सिराज के शव को उठाया। भीड़ ने उनको पीटा, उनकी हड्डियों को तोड़ा और उनके शरीर ने आग लगा दी।

अपनी मजबूरी को प्रदर्शित करते हुए कुशवाहा ने कहा, हमने लोगों को एक युवक को मारते हुए देखा था जिसे बच्चा चोर बताया जा रहा था।अगले 45 मिनट में हमने भीड़ के कुछ सदस्यों से बात की, उन्हें शांत करने की कोशिश की। लेकिन आप उन सभी का क्या कर सकते हैं, जो हिंसा पर उतारू हों? वहाँ इतने सारे लोग थे।

वहाँ बहुत हंगामा हुआ, मैंने अपने कैरियर में कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया। अपने कर्तव्य पर एएसआई सशभुसन गोपे ने भी पुलिस की विफलता का प्रदर्शन किया तथा कहा कि कृपया मैं आप से प्रार्थना करता हूं मुझसे बात मत करो, मैं सिर्फ एक छोटा अधिकारी हूँ, मैं वहां गया था लेकिन मैं आपसे बात नहीं कर सकता, कृपया मेरे वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करें।

एक अन्य एएसआई मनोज कुमार सिंह उस समय बनाये गए वीडियो में दिखाई दे रहे हैं। अब बीमारी के कारण सिंह छुट्टी पर हैं। भीड़ ने शोभपुर में दो मकानों को तोड़ दिया, जिसमें हलीम के रिश्तेदार मुर्तजा भी शामिल थे। उन्होंने मेरे घर का सफाया कर दिया और मेरे परिवार में महिलाओं को धक्का दिया।

उन्होंने नईम को पकड़ा, जब उसने भागने की कोशिश की तो उसके पैर तोड़ दिए। फिर, उसे मुख्य सड़क पर खींच लिया और मार दिया। मुर्तजा ने कहा कि पुलिस भी वहां मौजूद थी।

राइटअप : सना सिकंदर

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