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झारखंड: पुलिस वालों के सामने भीड़ ने पीट-पीट कर की थी नईम की हत्या, वीडियो में हुआ खुलासा

बीते 18 मई को झारखंड के शोभापुर में बच्चा चोरी की अफ़वाह के बाद मारे गए मुस्लिम युवकों के मामले में एक चौकाने वाला खुलासा हुआ है।

दरअसल भीड़ द्वारा जब नईम को बेरहमी से मारा जा रहा था तो इस मंज़र की चश्मदीद सिर्फ़ आम लोगों की भीड़ ही नहीं थी, बल्कि इस दौरान वहां पुलिसवाले भी मौजूद थे जो सनकी भीड़ के पागलपन को मूकदर्शक बने देखते रहे।

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया में सामने आया है जिसमें साफतौर से देखा जा सकता है कि भीड़ के साथ कुछ पुलिस वाले भी मौके पर मौजूद दिख रहे हैं।

इन्डियन एक्प्रेस की ख़बर के मुताबिक, इस घटना के चश्मदीदों में एक पुलिस डीएसपी, एक सर्किल इंस्पेक्टर, दो पुलिस एएसआई और कम से कम 30 पुलिसवाले शामिल हैं। इसके अलावा तमाशा देखने वालों में राजनगर पुलिस थाने के पुलिसवाले थे भी थे जिसके तहत घटनास्थल आता है।

बता दें कि 17 मई को हल्दीपोखर के रहने वाले नईम, सज्जू, सिराज और हलीम 15 किलोमीटर दूर स्थिल शोभापुर हलीम के साले शेख मुर्तजा के घर गए थे। 18 मई की सुबह चारो हल्दीपोखर स्थित अपने रिश्तेदारों को फोन करने लगे कि वो भीड़ से घिर गए हैं और उन्हें बचाया जाए।

हलीम के बड़े भाई शेख सलीम कहते हैं, “हम अपनी पहचान छिपाने के लिए हेलमेट पहनकर कुछ लोगों के साथ मोटरसाइकिल से पहुंचे लेकिन सैकड़ों लोगों को देखकर हम भाग गए। वो हमें सुबह छह बजे तक फोन करते रहे। फिर उनका फोन नहीं आया।”

18 मई की सुबह छह बजे राजनगर पुलिस थाने पर कुछ गांववालों ने फोन किया। 6.30 बजे तक थाना प्रभारी कुशवाहा, दो एएसआई और पांच हवलदारों के साथ शोभापुर पहुंच गए।

कुशवाहा कहते हैं, “हम वहां पहुंचे तो लोग एक नौजवान को बच्चा चोर बताकर पीट रहे थे। हमने भीड़ से बात करके उन्होंने मनाने की कोशिश की लेकिन उनके सिर पर खून सवार था। वहां बहुत ज्यादा लोग थे और भीड़ बढ़ती ही जा रही थी…मैंने अपनी जिंदगी में ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया था।”

चश्मदीदों और पीड़ितों के परिवारवालों के अनुसार सज्जू, सिराज और हलीम जान बचाकर भागने में सफल रहे। लेकिन भीड़ नईम को तीन घंटे तक लाठी और रॉड से पीटती रही। पुलिस देखती रही।

दोपहर करीब 1 बजे पुलिस ने सज्जू और सिराज के शव पड़नामसाई से बरामद किया। भीड़ में से कुछ लोगों ने उनका पीछा किया था और उन्हें मार कर उनके शरीर में आग लगा दी थी।

पीड़ितों के परिजनों का कहना है कि उन्होंने पुलिस को सूचित किया था कि लेकिन पुलिस ने उसका  संज्ञान नहीं लिया।

 

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