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झारखंड: हत्या के विरोध में मुसलमानों ने काला बिल्ला लगाकर पढ़ी जुमे की नमाज़, सरकार से मुआवज़े की मांग

बीते दिनों जिन चार लोगों की झारखंड के गांव शोभापुर में बच्चा चोरी की अफ़वाह के बाद पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी, वह सभी हल्दीपोखर गांव के रहने वाले थे।

इस घटना से हल्दीपोखर ग्रामीणों में सरकार के प्रति भी बेहद गुस्सा है। कल जुमे की नमाज़ के बाद यहाँ टाटा, रांची और आस पास के मुस्लिम समाज के लोगों ने मिलकर एक बैठक भी की और पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें हर संभव मदद देने का भरोसा भी दिया गया।

लोगो मे इस बात का और गुस्सा था कि कल जो एक इंसान हालिम शेख़ लापता था, उसकी लाश अब काफी बुरी हालत में मिली है। हत्यारों ने उसे मारकर उसकी लाश को आग लगा दिया।

हालाँकि गाँव वाले लगातार पुलिस को हालिम की खोज निकालने की ज़ोर दे रहे थे पर पुलिस ने वक्त रहते कोई कारवाई की।

इस बीच ख़बर है कि हल्दीपोखर के ग्रामीणों ने भीड़ द्वारा मारे गए चारों लोगों की लाश लेने से इंकार कर दिया है। इनके विरोध के कारण पुलिस इनका पोस्टमार्टम कराने में भी नाकाम रही।

यहां के मुखिया सैयद जबीउल्लाह ने ने बताया, “कल और आज गांव में लोगों की बैठक हुई। इसमें फैसला लिया गया कि जबतक सरकार मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी नहीं देती, गांव वालों का विरोध जारी रहेगा। अगर प्रशासन ने शीघ्र ही हत्यारों को गिरफ्तार नही किया, तो हम अपने विरोध को और धार देंगे।”

उन्होंने बताया कि गांव के लोगों ने कल जुमे की नमाज भी काला बिल्ला लगाकर पढ़ी।

वहीँ, पूर्वी सिंहभूम के डीडीसी सूरज कुमार व ग्रामीण एसपी शैलेंद्र बरनवाल को हल्दीपोखर में तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा।

जैसे ही उनलोगों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, भीड़ हल्ला करने लगी। मृतकों के परिजनों ने उनके द्वारा मुआवजे के तौर पर लाए गए 2-2 लाख रुपये के चेक को भी लेने से मना कर दिया।

पूर्वी सिंहभूम के डीसी अमित कुमार भी इमारते शरिया के प्रतिनिधियों को लेकर देर रात हल्दीपोखर पहुंचे लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें भी बैरंग लौटा दिया।

गाँव वालों का कहना है कि इस घटना में मारे गए शेख नईम की बेटी को हर पंद्रह दिन पर डायलिसिस कराना पड़ता है। उनका भरा-पूरा परिवार है। नईम ही अकेला कमाने वाला इंसान था अब उनके  तीन बच्चे अनाथ हो गए हैं।

वे जिंदा थे, तो बिजनेस कर परिवार को पालते थे। उनके पिता भी बुजुर्ग हैं। अब उनके घर में कमाने वाला कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 2 लाख रुपये के मुआवजे से क्या होगा। सरकार 25 लाख का मुआवजा दे और नईम की पत्नी को सरकारी नौकरी।

 

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