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ज़िन्दगी में उतार-चढ़ाव के साथ भाषा के बैरिकेड को तोड़ कौसर बानू ने संस्कृत में जीते 2 गोल्ड मैडल

संस्कृत में 80.50 प्रतिशत अंक हासिल करने के वाली कौसर बानू को डॉ. ऐ डी शास्त्री मैडल और श्रीमद् भगवत रंगवधूत नरेश्वर मैडल से नवाज़ा गया है। एक स्कूल में पढ़ाने वाली कौसर को बीते कल वीर नर्मद साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी के कन्वोकेशन समारोह में सम्मानित किया गया।

कौसर बानो ने भारूच के श्री रंग नवचेतन महिला आर्ट्स कॉलेज से संस्कृत में मास्टर्स किया और भागवत पुराण और वेदांत में सबसे ज़्यादा अंक हासिल किए।

अपनी ज़िन्दगी के इस बेहद अहम दिन पर उन उतार-चढ़ाव वाले लम्हों को याद करते हुए भीगे गले से कौसर बताती हैं कि एक वक़्त ऐसा भी आया जब माली हालत ठीक न होने की वजह से उन्होंने पढ़ाई छोड़ने के बारे में सोचा लेकिन इस मुश्किल दौर में उनके पति और टीचर्स ने बहुत साथ दिया जिसकी बदौलत आज मैं यहाँ तक पहुँच सकी हूँ।

हालाँकि कौसर मानती है कि संस्कृत आसान भाषा नहीं है लेकिन फिर भी उन्होंने इसे चुना और साबित किया कि कड़ी मेहनत से आसानी से मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।

दिल में लगन हो तो न तो भाषा आपकी राह में रोढ़े अटका सकती है और न ही घर-परिवार की दुश्वारियां। अपनी इस खूबसूरत सफलता की बड़ी वजह कौसर पति रियाज़ का साथ और टीचर्स की दुवाओं को मानती हैं। रियाज़ सिन्ध शुगर कंपनी में काम करते हैं।

कौसर बताती हैं कि एक छोटे बेटे के साथ साथ नौकरी करना और फिर पढ़ाई पर ध्यान देना आसान नहीं था। काफी परेशानियाँ आईं लेकिन उनके मज़बूत इरादों ने आज नौकरी कर रही महिलाओं के लिए एक उदाहरण पेश किया है।

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