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आतंक के आरोप से बाइज्जत बरी हुए कय्यूम ने की वंजारा और गुजरात सरकार से हर्जाने की मांग

अक्षरधाम मंदिर आतंकी हमले के मामले से बाइज्जत बरी हुए मुफ्ती कय्यूम मंसूरी ने हर्जाने की मांग है। कय्यूम अंसारी ने इसके लिए सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने गुजरात सरकार और डीआईजी डी.जी. वंजारा समेत चार पुलिस अधिकारियों से 5 करोड़ रूपये बतौर हर्जाने की मांग की है।

नवभारत टाइम्स के मुताबिक, कय्यूम ने इसी महीने कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है जिसमें उन्होंने आईपीएस अधिकारी जी.एल. सिंघल, रिटायर्ड डीएसपी वी.डी. वानर, इंस्पेक्टर आर.आई. पटेल, डीआईजी वंजारा और गुजरात सरकार से 5 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की है। कय्यूम ने इस रकम की मांग आतंकवाद के इल्जाम में गलत तरीके से फंसाने की एवज में की है।

कय्यूम मंसूरी के वकील एम.एम. शेख ने बताया कि हर्जाना 11 वर्षों के उस सजा के एवज में मांगा जा रहा है, जिसे निर्दोष होते हुए भी कय्यूम ने हर पल डर-डर कर जिया है। उन्होंने कहा कि कय्यूम के परिवारवालों को भी उनको आतंकवाद के झुठे इल्जाम में फंसाने की वजह से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस दौरान उनकी कमाई कुछ नहीं थी और कानूनी लड़ाई में लगातार पैसे खर्च हो रहे थें।

गौरतलब है कि कय्यूम मंसूरी को सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों अक्षरधाम मंदिर आतंकी हमले के मामले में निर्दोष करार दिया था। उसके बाद कैद से बाहर आने पर मंसूरी ने ‘इलेवन ईयर्स बिहाईंड बार्स (सलाखों के पीछे के 11 साल)’ नामक एक किताब लिखी।

इस किताब में उन्होंने क्राइम ब्रांच की गैर-कानूनी कस्टडी के बारे में लिखा है। इस किताब के सामने आने के बाद डीआईजी वंजारा ने कय्यूम मंसूरी के खिलाफ 101 करोड़ का मानहानि का केस दर्ज कर दिया।

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