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दिल्ली के सिटी बत्रा हॉस्पिटल में किडनी रैकेट का भंडाफोड़, MBA छात्र की मदद से 4 गिरफ्तार

एमबीए छात्र जयदीप शर्मा

दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच ने किडनी के अवैध धंधे का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गुरुवार को सिटी बत्रा हॉस्पिटल में छापे मारी की और चार एजेंटों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए सभी को छह दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

क्राइम ब्रांच में ज्वाइंट कमिश्नर प्रवीर रंजन ने बताया कि उनकी टीम इस रैकेट के भंडाफोड़ के लिए 40 दिनों से लगी हुई थी। इसके पुलिस ने 24 साल के एक एमबीए छात्र की मदद ली और किडनी निकाले जाने के अवैध धंधे का भंडाफोड़ किया।

इसके लिए जयदीप शर्मा नाम के छात्र ने एजेंटों को किडनी बेचने का लालच देकर संपर्क साधा। जयदीप ने बताया कि उनका एक दोस्त पिछले साल सितंबर महीने में अचानक से लापता हो गया था। जयदीप के दोस्त ने ही उन्हें अच्छी कीमत पर किडनी बेचने की बात बताई थी। इसके बाद जयदीप को लगा कि यह कोई जरूर किसी रैकेट से जुड़ा मामला है।

जयदीप ने कहा कि इसके बाद से उन्होंने किडनी के धंधे में लगे लोगों का पीछा करना शुरू किया और एजेंटों से अपनी किडनी बेचने का प्रस्ताव रखा। यह मामला चार लाक में तय हुआ। इसके बाद जयदीप ने प्रेस रिपोर्टरों से संपर्क साधा। इतना ही नहीं जयदीप किडनी निकालने के दौरान स्टिंग ऑपरेशन की पूरी व्यवस्था की थी। इसी दौरान रिपोर्टरों ने इसकी सूचना क्राइम ब्रांच को भी दे दी।

ऑपरेशन के लिए गुरुवार को का समय तय हुआ। तभी ऑपरेशन से एक घंटा पहले दिल्ली पुलिस के क्राईम ब्रांच ने ऑपरेशन थियेटर में छापा मारा और रैकेट का भंडाफोड हुआ। ज्वाइंट सीपी प्रवीर रंजन ने बताया कि रैकेट चलाने वालों ने जयदीप को दिल्ली बुलाकर हौजरानी इलाके के एक मकान में ठहराया था, जहां उसके जैसे और भी लोग मौजूद थे।

एसपी ने बताया कि जिस कमरे में इनलोगों को ठहराया गया था वहां सुलेखा पांडा नाम की एक महिला उन की देखरेख के लिए रखी गई थी। किडनी डोनेट को ऑपरेशन से पहले ट्रेनिंग दी जाती थी। इतना ही नहीं इस दौरान, डोनर को कई मॉल्स में उस परिवार से मिलने के लिए बुलाया जाता, जिनके परिवार के सदस्य को किडनी लेनी होती है।

प्रवीर रंजन ने यह भी बताया कि जयदीप को बाकायदा किडनी खरीदने वाले परिवार जैसा हुलिया दिया गया, बातचीत की ट्रेनिंग दी गई। किडनी रेसीपियंट फैमिली की बातचीत जैसी शैली भी बताई गई। यहां तक की उसके लिए फर्जी दस्तावेज बनाएं गए जिनमें मार्कशीट तक शामिल था। चुंकि किडनी खरीदने वाला परिवार तेलगु था इसलिए जयदीप के मार्कशीट में एक भाषा तेलुगु भी पास दिखाया गया था।

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