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योर ऑनर…क्या गौरक्षकों का इतना आतंक कम नहीं है कि उसे आतंकी संगठन घोषित कर दिया जाए?

एक खुला खत सर्वोच्च न्यायालय के नाम!!

आदरणीय,
भारतीय सर्वोच्च न्यायालय

विषय :- मुसलमानों के प्रति पुलिस प्रशासन का जो दोहरा रवैया होता है, उन कानुन के रखवालों के लिए कोई कानुन क्यों नहीं ?

माननीय,
योर ऑनर…… अलवर में एक बुजुर्ग को पीट पीटकर मार डाला गया और दो नौजवानों को जिन्दा जलाने का प्रयास किया गया और पुलिस वाले वहाँ मौजूद रहकर तमाशा देख हंस रहे थे। इसकी वीडियो क्लिप भी मौजूद है। इस मामले के बाद आपने भारत के 6 राज्यों को नोटिस भेज प्रश्न किया है कि गौरक्षकों की गुंडागर्दी बढ़ती जा रही है और इनको प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए। उम्मीद है जल्द से जल्द इन गौरक्षकों को भारत में प्रतिबंधित किया जाएगा, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि हमेशा से जो पुलिस प्रशासन का मुसलमानों के प्रति दोहरा रवैया रहा है उनके खिलाफ कोई कानुन क्यों नहीं ? पुलिस प्रशासन का मुसलमानों के प्रति यह दोहरा रवैया आजका नहीं है।

गुजरात से मुजफ्फरनगर तक पुलिस का मुसलमानों के प्रति दोहरी नीति पर प्रश्न उठते रहे हैं। खालिद मुजाहिद से लेकर मिन्हाज और इमरान खान जिनकी मौत का रहस्य प्रशासन के इस दोहरी नीति पर प्रश्न करते रहे हैं, बेकसूर जेल में रहने वाले निसार से लेकर मोहम्मद रफीक़ तक जिन्हे जेल में तरह तरह से प्रताड़ित किया गया। यहाँ तक कि उनके मुताबिक मुत्र भी पिलाई गई जैसे वाक्ये प्रशासन की इस दोहरी नीति को बेनकाब करते रहे हैं।

मेवात में परीवार के सामने बच्ची के साथ गैंगरेप फिर बुलंदशहर के खुर्जा में बजरंगदल कार्यकर्ताओं द्वारा मुस्लिम जोड़े से मारपीट और लड़की से गैंगरेप फिर बिहार नवादा में मुस्लिम नाबालिग के साथ गैंगरेप में दोषियों के प्रति कोताही भी प्रशासन के इस दोहरी नीति को बेनकाब करता रहा है। इशरत जहाँ से लेकर भोपाल में 8 मुस्लिमों के फेक इंकाऊंटर भी प्रशासन का मुसलमानों के प्रति दोहरी नीति को बेनकाब करते रहे हैं।

योर ऑरनर्स आखिर कब तक ऐसा चलेगा ? कब तक मुस्लिमों को प्रशासन की इस दोहरी नीति का सामना करना पड़ेगा ? चलिए इन सारे मामलों को छोड़ देते हैं। बात गौरक्षकों द्वारा गुंडागर्दी पर प्रशासन की सफलता और विफलता की करें तो अब तक कितनों को पकड़ा गया ? कितनों को सजा हुई ? ये रहे उनकी गुंडागर्दी की फेहरिस्त, आप ही बताइएगा कि हम क्यों न कहें कि प्रशाशन मुसलमानों के प्रति दोहरी नीति अपनाती आई है ?

• सितम्बर 2015 में अखलाक पर सैकड़ों की संख्या में गौरक्षकों ने हमला किया और उन्हे जान से मार दिया गया। उन सैकड़ों में कितने लोग पकड़े गए ये तो आपको पता है। उन में भी कातिल की लाश को तिरंगे से लपेटना मुसलमानों के प्रति दोहरी नीति नहीं तो और क्या है ?

• अक्टूबर 2015 को जम्मू कश्मीर विधानसभा में बीजेपी के विधायकों ने निर्दलीय विधायक इंजीनियर शेख अब्दुल राशिद की पिटाई कर दी, आरोप था कि उन्होंने बीफ पार्टी किया है जिसके बाद उनपर स्याही भी फेकी गई, कितने पकड़ाए ? कितनों को सजा हुई ?

• 17 अक्टूबर 2015 को गाय की तस्करी के शक में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हिमांचल के नोमान को पीटपीट कर मार डाला था। पुलिस को नोमान की घायल अवस्था में मिला जिसे बाद में अस्पताल ले जाया गया और वहां उसने दम तोड़ दिया। इस मामले में दर्जनों पर केस दर्ज किया गया था जिसके बाद हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया। क्यों ?

• सहारनपुर से लापता 27 वर्षीय मुस्तैन का शव 2 अप्रैल 2016 को कुरुक्षेत्र में पाया गया। उनके पिता ताहिर हसन ने 9 मई को गौरक्षक दल के सदस्यों पर हत्या का आरोप लगाया था, कितने पकड़े ? कितनों को सजा हुई ?

• 6 मई 2016 को हरियाणा के सोहना में तीन लोगों ने गोमांस ले जाने के आरोप में 20 वर्षीय वसीम की बेरहमी से पिटाई की और चौथा रिकॉर्डिंग कर रहा था। जबकि हमलावर बंदूक के साथ जान से मारने की धमकी दे रहे थे। इस मामले में तो उलटा वसीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई लेकिन हमलावरों के खिलाफ कोई मामला नहीं चला। योर ऑनर बताइए ये क्या था ?

• 10 जून 2016 को हरियाणा में गोरक्षक दल के सदस्यों ने गोमांस तस्करी के आरोप में रिजवान और मुख्तियार को रोककर गोबर खिलवाया। और न्याय का आलम ये था की उलटा गोमांस तस्करी के लिए दोनों मुसलिम को जेल भेज दिया। योर ऑरनर बताइए ये क्या था ?

• 18 मार्च 2016 को झारखंड के लातेहार जिले के बालूमठ थाना क्षेत्र के झबरा गांव में मवेशी व्यापारी मजलूम अंसारी, और इम्तियाज खान उर्फ छोटु को बेरहमी से पीटा गया उसके बाद उनके साथ लूटपाट की गई और फिर एक पेड़ से फांसी पर लटका दिया। इस मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों में से पांच की गिरफ्तार किया था जबकि तीन अन्य ने अदालत में सरेंडर कर दिया था। इनमें से एक आरोपी गोरक्षक दल के साथ जुड़ा हुआ था जबकि दूसरे उसके साथी थे। अभी तक सभी आरोपी जेल में हैं सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया है। सजा कब सुनाई जाएगी योर ऑनर ?

• 13 जनवरी 2016 को गोरक्षकों ने एक मुस्लिम जोड़े को एमपी के खिरकिया रेलवे स्टेशन पर उनके बैग पर आपत्ति जताते हुए पीट दिया। जिससे मांस जब्त किया गया था लेकिन परीक्षण में मालूम हुआ की वह गाय का नहीं था। कितनों को पकड़ा गया ?

• 26 जुलाई 2016 को दो मुस्लिम महिला को एमपी के मंदसौर रेलवे स्टेशन पर बीफ के शक में पीटा गया। बहुत विरोध के बाद उस भीड़ में से इस मामले में कुछ छह लोग गिरफ्तार किए गए जिनमें दो महिलाएं शामिल थी।

• 14 मार्च 2016 को चित्तौड़गढ़ के प्राइवेट मेवाड़ विश्वविद्यालय के हॉस्टल में स्थानीय छात्रों ने हंगामा कर दिया कि कश्मीरी छात्र गाय का मांस पका रहे हैं। जिसके बाद चार कश्मीरी छात्रों को फौरन गिरफ्तार किया गया। हालांकि बाद में लैब की रिपोर्ट में कहा गया कि मांस गाय का नहीं था। जिसके बाद उन्हें जमानत पर रिहा किया गया। योर ऑनर छात्रा मुसलिम न होते तो ?

• और सबसे दर्दनाक हादसा 24 अगस्त 2016 मेवात के एक मुसलिम परीवार पर गौरक्षकों की हैवानियत, दो लोग रशीनद और इब्राहीम की हत्या, आयेशा और जफरुद्दी गम्भीर रूप से घायल, और दो नाबालिग बच्चियों का परिवार के सामने गैंगरेप । कितनों को पकड़ा गया ? कितनों को सजा हुई ?

योर ऑनर, मैं जनना चाहता हूँ की एक आतंकी संगठन को आतंकी संगठन घोषित करने के लिए उनके द्वारा कितने मारपीट, दंगा-फसाद, खुन खराबा होना जरुरी होता है ? क्या भारत में गौरक्षकों द्वारा इतना आतंक कम नहीं है कि उसे एक आतंकी संगठन घोषित कर दिया जाए और उसपर पुर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया जाए? क्या मुसलमानों का खुन इतना सस्ता है कि उनका कोई मोल नहीं? क्या हर मामले में कानुनी कार्रवाई  के बिना पर दोहरी नीति का शिकार होता मुसलमान न्याय की उम्मीद छोड़ दे ? क्या ऐसे में मुसलमान पुलिस और प्रशासन पर अपना विश्वसनीयता बनाए रख सकते हैं ? क्या कानून के रखवाली करने वालों के लिए कोई ऐसा कानुन नहीं है जिसमें वो निष्पक्ष रहकर जनता की हिफाजत और हर मामले की जाँच कर सकें ? क्षमा चाहता हूँ योर ऑरनर्स, कयोंकि ये मेरा नहीं बल्कि भारत के 25 करोड़ मुसलमानों का आपसे सवाल है।

इस देश का स्वतंत्र नागरिक एंव मुसलमान,

  • अशरफ हुसैन 

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