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इस्लामाबाद: 4 सालों में कोई स्कूल तो नहीं खुला लेकिन मदरसों की हुई भरमार

इस्लामाबाद। बीते चार सालों में पाकिस्तान की सरकार ने इस्लामाबाद में कोई नया स्कूल नहीं खोला है लेकिन राजधानी में कई मदरसे शुरू हुए हैं।

एक ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक राजधानी में मदरसों की संख्या 374 है और इनमें से ज़्यादातर का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। प्रशासन द्वारा किए गए सर्वेक्षण से पता चला है कि ऐसे करीब 250 मदरसे हैं जिन पर सरकार की कोई पकड़ या प्रभाव नहीं है।

हालाँकि इससे पहले देश में मदरसों को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान ने एक नए अध्यादेश को मंजूरी दी थी। इसके तहत इन धार्मिक स्कूलों को सरकार से पंजीकरण कराना होगा। साथ ही कहा था कि जो मदरसे सरकार से पंजीकृत नहीं होंगे उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी और सरकारी सहायता से भी वंचित कर दिया जाएगा।

सर्वे में कहा गया कि राजधानी के जी -13 और जी -14 के नए आवासीय क्षेत्रों में कोई पब्लिक स्कूल नहीं है लेकिन कई मदरसे काम कर रहे हैं।

फेडरल डायरेक्टोरेट ऑफ एजुकेशन (एफडीई) के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि पिछले कई साल से हम कोई नया स्कूल नहीं खोल सके हैं। आईसीटी प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि साल 2013 के बाद से राजधानी के तमाम हिस्सों में कई नए मदरसे खोले गए हैं।

एक सूत्र ने बताया कि बोर्डिंग सुविधाओं वाले 374 मदरसों में 25,000 से अधिक छात्र पढ़ रहे थे जिसमें लगभग 12,000 छात्र इस्लामाबाद के और शेष अन्य शहरों और कस्बों से थे।

यह सर्वेक्षण देश के आतंकवादी गतिविधियों की हालिया घटनाओं के बाद गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान के निर्देश पर किया गया था। सर्वेक्षण दो चरणों में किया जा रहा है जिसमें पहले चरण में यह पता लगाया गए कि इन मदरसों का रजिस्ट्रेशन किया गया है या नहीं।

दूसरे चरण के दौरान कैपिटल डवलपमेंट अथॉरिटी (सीडीए) जांच करेगी कि पंजीकृत और अपंजीकृत दोनों मदरसे कहीं कब्ज़ा की हुई ज़मीन पर तो नहीं बनें हैं या कोई दूसरे नियम का तो उल्लंघन तो नहीं हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सर्वे का मकसद अपंजीकृत मदरसों को समाप्त करना है जो साल 1980 के बाद शुरू किए गए।

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