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महाराणा प्रताप को दलित बताने पर लेखिका को मिल रही है धमकी, वसुंधरा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य और लेखिका डॉ. कुसुम मेघवाल की महाराणा प्रताप पर लिखी किताब पर विवाद बढ़ता जा रहा है।
दरअसल डॉ. मेघवाल ने अपनी किताब ने महाराणा प्रताप को एक भील बताया है। जोकि एक दलित जाति से सम्बंधित है।

उन्होंने लिखा है कि राजपूत या क्षत्रिय कोई जाति नहीं होती बल्कि उसमें अलग-अलग जाति समूह के लोग होते हैं।
किताब में उस वक़्त के बारे में बताया गया है जब राजस्थान में भीलों का शासन हुआ करता था और उनके कई राजवंश रहे हैं। महाराणा प्रताप की मदद करने वाले लोग भी भील ही थे।

डॉ. मेघवाल ने बताया कि मैंने ये किताब पिछले दो साल पहले लिखी है। इस किताब में महाराणा प्रताप को भील बताने पर मुझे करणी सेना के सदस्य लगातार फोन पर धमकियां दे रहे हैं। मैंने इस बारे में पुलिस को उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी है।

लेकिन अभी तक उनकी सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया गया है। क्योंकि वसुंधरा राजे सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती बल्कि उनको शह देती है।

उन्होंने कहा, ‘क्या पुलिस किसी घटना के अंदेशा का इंतजार कर रही, कि घटना घट जाए और उसके बाद कोई कार्रवाई की जाए? यह देश किसी करणी सेना से नहीं चलेगा। ये देश संविधान से चलता है जो हमें अभिव्यक्ति की आजादी देता है?’

उन्होंने साफ़ कहा कि आप को किसी बात पर आपत्ति है तो कोर्ट जाओ, या किताब के बदले किताब लिखों या फिर क़ानून के दायरे में रहकर किताब पर बैन लगवाओ।

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