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MANUU में बेक़ाईदगियों की तहक़ीक़ात के लिए कमेटी का क़ियाम

मौलाना आज़ाद नैशनल उर्दू यूनीवर्सिटी में गुज़िश्ता कई बरसों की बेक़ाईदगियों के बारे में रोज़नामा सियासत के इन्किशाफ़ात का असर अब दिखाई देने लगा है। यूनीवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉक्टर मुहम्मद असलम परवेज़ ने बाअज़ बेक़ाईदगियों की जांच का ऐलान किया और इस सिलसिला में तहक़ीक़ाती कमेटी क़ायम की गई।

यूनीवर्सिटी में वाई-फाई सहूलत की फ़राहमी, यूनीवर्सिटी वेबसाइट की तैयारी और मनीपाल के प्रैस में निसाबी कुतुब की इशाअत जैसे मुआमलात की जांच के लिए प्रोफ़ेसर मुहम्मद सुलेमान सिद्दीक़ी की सदारत में तहक़ीक़ाती कमेटी क़ायम की गई।

कमेटी के अरकान में प्रोफ़ेसर आई बी राम प्रसाद राव और प्रोफ़ेसर पी एस एन रेड्डी शामिल किए गए हैं। तहक़ीक़ाती कमेटी इन तीनों मुआमलात की तफ़सीली जांच करते हुए वाइस चांसलर को रिपोर्ट पेश करेगी।

प्रोफ़ेसर सुलेमान सिद्दीक़ी और उनकी टीम ने यूनीवर्सिटी में तहक़ीक़ात का आग़ाज़ कर दिया है और यूनीवर्सिटी हुक्काम से उन मुआमलात से मुताल्लिक़ फाईलें तलब की हैं।

वाज़ेह रहे कि वाइस चांसलर की ज़िम्मेदारी सँभालने के बाद डॉक्टर असलम परवेज़ ने गुज़िश्ता 18 बरसों के दौरान तक़र्रुरात, तरक़्क़ी और दीगर मुआमलात में मुबैयना बेक़ाईदगियों और बदउनवानीयों की जांच का आग़ाज़ कर दिया है।

टीचिंग और नन टीचिंग दोनों शोबों में क़वाइद की ख़िलाफ़वर्ज़ी के ज़रीए तक़र्रुरात और तरक़्क़ी की जांच की जाएगी। बताया जाता है कि जिन नाअहल अफ़राद को तरक़्क़ी दी गई, जांच में साबित होने पर उनकी तनज़्ज़ुली का फ़ैसला किया गया है।

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