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संदिग्धों को ISIS का आतंकवादी साबित करने पर तुला मीडिया

उत्तर प्रदेश एटीएस ने पांच राज्यों की पुलिस के साथ संयुक्त अभियान में अलग-अलग जगहों से चार संदिग्धों को गिरफ़्तार किया है। एटीएस के मुताबिक ये आतंकी घटना की साजिश बना रहे थे।

यूपी प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) दलजीत सिंह ने मीडिया को बताया कि इस ऑपरेशन में मुम्बई, जालंधर, नरकटियागंज (बिहार), बिजनौर और मुजफ्फरनगर में छापेमारी करके चार लोगों को दहशतगर्दाना साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

वहीं पांच अन्य को भी संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है लेकिन इनका किसी भी आतंकी संगठन से कोई संबंध नहीं है।

लेकिन इन गिरफ्तारियों के तुरंत बाद ही मीडिया में इन्हें ISIS आतंकी बताने की होड़ लग गई। इस बार न्यूज़ एजेंसी भी मीडिया की राह चलती दिखी। जैसे ही गिरफ़्तारियों की खबर आई लगभग सभी न्यूज़ चैनल और न्यूज़ पोर्टल ने गिरफ्तार संदिग्धों को आईएसएसआई का आतंकी बता दिया।

न्यूज़ एजेंसी ANI जिन्हें इस्लामिक स्टेट का संदिग्ध क़रार दे रही है, यूपी के एडीजी दलजीत चौधरी कह रहे हैं कि उनका किसी संगठन से कोई जुड़ाव नहीं है।

अभी तक हम अख़बार और टीवी के रिपोर्टर के बारे में ऐसा देखा करते थे कि मन में जो आए, वो बोले दो, लिख दो, मगर अब तो समाचार एजेंसी भी उसी राह पर चल पड़ी है। न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने भी इन संदिग्धों को आतंकी लिख दिया।

न्यूज़ चैनल टाइम्स नाउ ने खबर ब्रेक करते हुए लिखा कि दिल्ली पुलिस ने आईएसएसआई का मॉडूल्य पकड़ा है और यूपी पुलिस ने तीन आईएस के संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार किए हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी लिखा कि यूपी एटीएस ने आईएस की तरफ़ झुकाव रखने वाले तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है।

ज़ी न्यूज़ लिखता है कि ” यूपी एटीएस का 5 राज्यों की पुलिस के साथ ज्वाइंट ऑपरेशन, ISIS के चार संदिग्ध आतंकी गिरफ़्तार, 5 हिरासत में।”

वहीँ खुद को देश का सबसे बड़ा ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल बताने वाले दैनिक भास्कर ने भी लिखा कि 6 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार।

दैनिक जागरण लिखता है कि ”आतंकी साजिश में यूपी एटीएस की हिरासत में बिजनौर की मस्जिद का मुफ़्ती और कारी”

मुस्लिम युवकों की गिरफ़्तारी पर अखबार, न्यूज़ चैनल और अब समाचार एजेंसियां बेहद ग़ैर ज़िम्मेदारी तरीके से खबरे लिखती हैं। किसी भी युवक की गिरफ्तारी पर अब संदिग्ध नहीं लिखा जाता है। लगभग सभी मीडिया हाउस अब सीधे इनका संबंध आतंकी संगठनों से जोड़ अपना फ़ैसला सुना देते हैं फिर चाहे वो जांच में बेकसूर ही क्यों न निकलें।

 

 

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